टोक्यो: जापान की राजधानी टोक्यो और पूर्वी जापान के कई इलाकों में रविवार तड़के 5.9 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के अनुसार भूकंप का केंद्र दक्षिणी इबाराकी प्रांत में करीब 70 किलोमीटर की गहराई पर था। भूकंप के झटके टोक्यो समेत आसपास के कई इलाकों में महसूस किए गए। इस भूकंप में 20 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है। अधिकांश लोगों को मामूली चोटें आईं। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल सुनामी का कोई खतरा नहीं है।
इबाराकी में सबसे ज्यादा झटके, टोक्यो में भी महसूस हुआ असर
JMA के मुताबिक भूकंप रविवार सुबह करीब 2 बजे आया। इसका केंद्र दक्षिणी इबाराकी में था और गहराई लगभग 70 किलोमीटर दर्ज की गई। जापान की सात-स्तरीय भूकंपीय तीव्रता प्रणाली पर कुछ इलाकों में अधिकतम 5 कमजोर (5-lower) की तीव्रता दर्ज हुई। टोक्यो के 23 वार्डों में भी झटके महसूस किए गए। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने शुरुआती तौर पर भूकंप की तीव्रता 5.8 बताई, जबकि JMA ने इसे 5.9 दर्ज किया।
लोगों में मची अफरा-तफरी, ज्यादातर चोटें मामूली
भूकंप तड़के आया, जब बड़ी संख्या में लोग सो रहे थे। अचानक झटके महसूस होने के बाद कई लोग घबराकर उठे और कुछ लोग गिरने या आसपास की वस्तुओं से टकराने के कारण घायल हुए। एक बुजुर्ग महिला को गंभीर रूप से चोट लगने की भी जानकारी सामने आई है। अधिकारियों ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति और पानी की पाइपलाइन पर भी असर की जानकारी सामने आई है, हालांकि स्थिति को तेजी से सामान्य किया गया। परमाणु संयंत्रों में किसी असामान्य स्थिति की सूचना नहीं मिली।
ट्रेनों की रफ्तार पर भी पड़ा असर
भूकंप के बाद पूर्वी जापान में रेल सेवाएं प्रभावित हुईं। टोक्यो और नारिता एयरपोर्ट के बीच चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेनों समेत कुछ लोकल ट्रेनों में देरी हुई। हालांकि, शिंकानसेन बुलेट ट्रेन सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहीं।
भूकंप क्यों आता है? समझिए आसान भाषा में
भूकंप पृथ्वी की सतह के नीचे मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के कारण आते हैं। पृथ्वी की बाहरी परत कई बड़ी और छोटी प्लेटों में बंटी हुई है। ये प्लेटें लगातार बहुत धीमी गति से घूमती और एक-दूसरे के सापेक्ष खिसकती रहती हैं। जब इन प्लेटों के बीच तनाव बढ़ता है और चट्टानें उस दबाव को सहन नहीं कर पातीं, तो किसी फॉल्ट (Fault) के आसपास अचानक ऊर्जा रिलीज होती है। यही ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में चारों तरफ फैलती है और हमें जमीन के हिलने के रूप में महसूस होती है।
जापान में इतने ज्यादा भूकंप क्यों आते हैं?
जापान दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में से एक है। इसका बड़ा कारण यह है कि जापान पैसिफिक रिंग ऑफ फायर के क्षेत्र में स्थित है, जहां कई टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे से टकराती या एक के नीचे दूसरी धंसती हैं। इसी वजह से जापान में लगातार छोटे-बड़े भूकंप आते रहते हैं और वहां इमारतों, परिवहन व्यवस्था तथा आपदा प्रबंधन को भूकंप के जोखिम को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है।
क्या हर भूकंप से सुनामी आती है?
नहीं। हर भूकंप सुनामी पैदा नहीं करता। आमतौर पर समुद्र के नीचे आने वाला ऐसा शक्तिशाली भूकंप, जिसमें समुद्र तल में अचानक बड़ा विस्थापन हो, सुनामी पैदा कर सकता है। इस मामले में भूकंप का केंद्र जमीन के नीचे दक्षिणी इबाराकी क्षेत्र में करीब 70 किलोमीटर गहराई पर था। इसलिए अधिकारियों ने सुनामी का खतरा नहीं बताया है।
आफ्टरशॉक का खतरा क्यों रहता है?
बड़े भूकंप के बाद उसी क्षेत्र में छोटे झटके आ सकते हैं, जिन्हें आफ्टरशॉक कहा जाता है। भूकंप के दौरान चट्टानों में जमा तनाव अचानक रिलीज होने के बाद आसपास की संरचना कुछ समय तक खुद को समायोजित करती रहती है। इसलिए जापानी अधिकारी और स्थानीय प्रशासन आगे आने वाले झटकों तथा संभावित नुकसान पर नजर बनाए हुए हैं।