जापान में संसदीय चुनावों का बिगुल बज चुका है और इसी के साथ शुरू हो गई है वह राजनीतिक जंग जिसने पूरे एशिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस बार मुकाबले की सबसे बड़ी वजह हैं प्रधानमंत्री साने ताकाइची—जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री, जिनकी लोकप्रियता तेज़ी से बढ़ी है, पर उनकी पार्टी एलडीपी अभी भी जनता के भरोसे की वास्तविक परीक्षा से गुजर रही है।
पहली महिला प्रधानमंत्री और बदलता जापान
साने ताकाइची जापानी राजनीति में लंबे समय से रूढ़िवादी विचारों की मुखर आवाज़ रही हैं। अक्टूबर में सत्ता संभालते ही उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि उनका लक्ष्य केवल शासन करना नहीं बल्कि जापान की पुरानी राजनीतिक धारणाओं को चुनौती देना है। वह अपने दृढ़, निर्णायक और कभी-कभी मज़ाकिया स्वभाव के कारण युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। लेकिन लोकप्रियता ही सत्ता की गारंटी नहीं होती, और यही उनकी सबसे बड़ी परीक्षा का कारण भी बना है।
चुनावी दांव: क्यों बुलाए गए अचानक चुनाव?
एलडीपी, जिसने सात दशकों से अधिक समय तक जापान की राजनीति पर अपनी पकड़ बनाए रखी है, इन दिनों संघर्ष के दौर से गुजर रही है। इसकी छवि को सुधारने और अपने एजेंडे को मजबूत जनादेश के साथ आगे बढ़ाने के लिए ताकाइची ने अचानक चुनाव कराने का फैसला किया। यह राजनीतिक दांव बड़ा है, क्योंकि अगर पार्टी बहुमत नहीं ला पाई तो ताकाइची ने स्वयं इस्तीफे की घोषणा कर दी है।
राष्ट्रवाद और सुरक्षा—ताकाइची का विज़न
चीन के साथ बढ़ते तनाव और एशिया-प्रशांत क्षेत्र की अस्थिरता को देखते हुए ताकाइची जापान की सैन्य तथा आर्थिक क्षमता को मजबूत करना चाहती हैं। उनकी दक्षिणपंथी नीतियाँ—सेना के बजट में वृद्धि, अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों का विस्तार और विशेष रूप से अमेरिका के साथ गहरे रणनीतिक संबंध—चुनाव का प्रमुख मुद्दा बनी हुई हैं। समर्थकों का मानना है कि यह नीतियाँ जापान को भविष्य के खतरों के लिए सक्षम बनाएंगी, जबकि विरोधी इसे क्षेत्र में और अधिक तनाव बढ़ाने वाला कदम बताते हैं।
कमज़ोर विपक्ष और आसान राह?
चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के अनुसार एलडीपी को भारी जीत मिलने के संकेत मिल रहे हैं। विपक्ष बिखरा हुआ है, अनेक दलों के पास न स्पष्ट विचार हैं न मजबूत नेतृत्व। ऐसे में ताकाइची का आत्मविश्वास बढ़ना स्वाभाविक है। जापानी जनता यह भी महसूस कर रही है कि वर्तमान वैश्विक स्थिति में स्थिर नेतृत्व के बिना देश असुरक्षित हो सकता है, और यही भावनाएँ एलडीपी के पक्ष में माहौल बनाती दिखाई दे रही हैं।
मौसम बनेगा बड़ी चुनौती
उत्तरी जापान में रिकॉर्ड बर्फबारी ने मतदान प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मतदान प्रतिशत को प्रभावित कर सकती है, जिससे अंतिम परिणामों पर असर पड़ेगा। मतगणना के दौरान भी असामान्य मौसम मुश्किलें पैदा कर सकता है।
जापान का भविष्य किस दिशा में?
यह चुनाव केवल एक राजनीतिक परीक्षा नहीं है बल्कि जापान के भविष्य की दिशा तय करेगा। अगर ताकाइची भारी बहुमत के साथ लौटती हैं तो जापान के राजनीतिक और सुरक्षा ढांचे में बड़े बदलाव देखे जा सकते हैं। यह चुनाव जापान की राजनीति में महिला नेतृत्व की नई इबारत भी लिख सकता है।
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