मैक्रों ने इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में अपने संबोधन की शुरुआत ‘नमस्ते’ कहकर की और भारत की डिजिटल क्रांति की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने वह कर दिखाया है जो दुनिया का कोई और देश नहीं कर सकता। उन्होंने माना कि भारत की डिजिटल पहचान प्रणाली, भुगतान तंत्र और नागरिक-केंद्रित तकनीकी मॉडल दुनिया के लिए एक प्रेरणा बन चुके हैं।
मुंबई से शुरू हुई मैक्रों की भारत यात्रा
अपनी भारत यात्रा की शुरुआत मुंबई से करने वाले मैक्रों ने समिट में उस अनुभव का ज़िक्र किया जिसने उन्हें सबसे अधिक प्रभावित किया। उन्होंने बताया कि मुंबई की रात में टहलते समय उन्हें एक सड़क विक्रेता मिला जिसने डिजिटल भुगतान अपनाकर अपनी पूरी जिंदगी बदल दी। कुछ वर्ष पहले वह बैंक खाता तक नहीं खोल सकता था, पर आज उसी के फोन पर डिजिटल पेमेंट धड़ाधड़ हो रहे हैं।
सामान्य नागरिक के जीवन में तकनीक का प्रभाव
मैक्रों ने कहा कि यह केवल तकनीक की कहानी नहीं, बल्कि सभ्यता की कहानी है। उनका आशय था कि भारत ने तकनीक को केवल सुविधा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे सामाजिक परिवर्तन का आधार बना दिया। उन्होंने विशेष रूप से UPI और डिजिटल पहचान प्रणाली के व्यापक प्रभाव को रेखांकित किया, जो गांव से शहर तक हर स्तर पर नागरिकों को सशक्त बना रहे हैं।
दुनिया को चकित करने वाली भारत की डिजिटल संरचना
समिट में मैक्रों ने नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में बताया कि भारत ने 1.4 अरब लोगों के लिए एक डिजिटल पहचान तैयार की है जो दुनिया में अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि भारत में आज हर महीने 20 बिलियन डिजिटल ट्रांज़ैक्शन हो रहे हैं, जो किसी भी विकसित राष्ट्र के लिए भी आश्चर्य का विषय है। साथ ही 500 मिलियन से अधिक डिजिटल हेल्थ ID जारी कर भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीकी लोकतांत्रिकरण की मिसाल पेश की है।
भारत की गति, नवाचार और दृष्टि का प्रभाव
दिल्ली में आयोजित पांच दिवसीय समिट में तकनीकी विशेषज्ञों, बिजनेस लीडर्स और नीति-निर्माताओं के बीच मैक्रों का संबोधन दुनिया को संकेत देता है कि भारत अब केवल टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता और नेतृत्वकर्ता बन चुका है। भारत की डिजिटल क्रांति ने न केवल आर्थिक संरचना बदली है बल्कि आम लोगों की जिंदगी को भी तेज़, सुरक्षित और पारदर्शी बनाया है। यही वह कारण है कि फ्रांस समेत दुनिया के कई देश भारत के डिजिटल मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं।
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