प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार देर रात 2 दिवसीय यात्रा पर उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुंचे, जहां राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव ने स्वयं उनका स्वागत किया। स्वागत समारोह के दौरान दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी साफ नजर आई और इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी तथा राष्ट्रपति मिर्जियोयेव एक ही कार में सवार होकर हवाई अड्डे से राष्ट्रपति भवन के लिए रवाना हुए। दोनों नेताओं की यह तस्वीर और वीडियो सामने आने के बाद कूटनीतिक हलकों में इसे ‘कार डिप्लोमेसी’ के एक और उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले भी प्रधानमंत्री मोदी कई विदेशी नेताओं के साथ एक ही वाहन में यात्रा करते हुए नजर आ चुके हैं, जिसने व्यक्तिगत विश्वास और सहज राजनीतिक संवाद की तस्वीर पेश की है।
स्वागत में दिखी भारत-उज्बेकिस्तान की दोस्ती की गर्माहट
ताशकंद पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत बेहद आत्मीय अंदाज में किया गया। राष्ट्रपति मिर्जियोयेव की मौजूदगी में औपचारिक स्वागत समारोह हुआ और उज्बेकिस्तान का राष्ट्रगान बजाया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस विशेष स्वागत के लिए उज्बेक राष्ट्रपति का आभार व्यक्त किया और कहा कि ताशकंद पहुंचने पर उन्हें राष्ट्रपति मिर्जियोयेव की ओर से गर्मजोशी भरा स्वागत मिला। दोनों नेताओं के बीच पहले से ही मजबूत व्यक्तिगत समीकरण रहे हैं और इस यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात को भारत तथा उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
‘कार डिप्लोमेसी’ का क्या है कूटनीतिक मतलब
किसी विदेशी नेता के साथ एक ही कार में यात्रा करना अपने आप में कोई औपचारिक कूटनीतिक समझौता नहीं होता, लेकिन ऐसी तस्वीरें राजनीतिक और प्रतीकात्मक संदेश जरूर देती हैं। आम तौर पर किसी नेता के साथ इस तरह की अनौपचारिक यात्रा औपचारिक बैठकों से अलग व्यक्तिगत सहजता, विश्वास और संवाद के माहौल को दर्शाती है। प्रधानमंत्री मोदी की ऐसी तस्वीरें पहले भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चर्चा का विषय रही हैं। इन यात्राओं के दौरान दोनों नेताओं को अपेक्षाकृत अनौपचारिक माहौल में बातचीत का अवसर मिलता है, जिससे औपचारिक वार्ताओं से पहले व्यक्तिगत संबंधों को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
पुतिन के साथ यात्रा के बाद फिर चर्चा में आया यह अंदाज
‘कार डिप्लोमेसी’ की चर्चा प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की उस यात्रा के बाद खास तौर पर बढ़ी थी, जब दोनों नेता 2025 में चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के दौरान द्विपक्षीय वार्ता के लिए एक साथ कार में रवाना हुए थे। उस समय दोनों नेताओं की साथ यात्रा करते हुए तस्वीरों ने काफी ध्यान आकर्षित किया था। इसके बाद विदेशी नेताओं के साथ प्रधानमंत्री मोदी की ऐसी यात्राओं को व्यक्तिगत कूटनीति और सहज संवाद के प्रतीक के तौर पर देखा जाने लगा। ताशकंद में मिर्जियोयेव के साथ उनकी कार यात्रा ने इसी कड़ी को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
व्यापार से रक्षा तक व्यापक मुद्दों पर होगी बातचीत
प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा केवल औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश, रक्षा, डिजिटल संपर्क, ऊर्जा, शिक्षा तथा लोगों के बीच संपर्क जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की जानी है। दोनों नेता भविष्य के सहयोग की दिशा और प्राथमिकताओं पर भी चर्चा करेंगे। इसके साथ ही भारत के ‘विकसित भारत 2047’ और उज्बेकिस्तान के ‘उज्बेकिस्तान-2030’ जैसे दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों के बीच सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है। ऐसे में दोनों नेताओं की व्यक्तिगत गर्मजोशी को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एससीओ शिखर सम्मेलन से पहले अहम मुलाकात
उज्बेकिस्तान यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त और 1 सितंबर को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन के 26वें शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। इस दौरान वे सुरक्षा, संपर्क और अवसरों से जुड़े भारत के दृष्टिकोण को सामने रखेंगे तथा संगठन के सदस्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय मुलाकातें भी करेंगे। मध्य एशिया में भारत की सक्रिय भागीदारी के लिहाज से उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की यह यात्रा महत्वपूर्ण है। ताशकंद में मिर्जियोयेव के साथ शुरुआती गर्मजोशी और साथ कार में सफर की तस्वीर ने यात्रा की शुरुआत को एक खास कूटनीतिक संदेश जरूर दे दिया है।