राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव में मतदान से पहले ही 77 वार्डों का चुनावी फैसला हो गया है। नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन वार्डों में मुकाबले में कोई प्रत्याशी नहीं बचा, जिसके चलते संबंधित उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।
BJP के खाते में सबसे ज्यादा सीटें
निर्विरोध चुने गए 77 पार्षदों में BJP के 44 उम्मीदवार शामिल हैं। यानी बिना मतदान के ही भाजपा ने 44 वार्डों में जीत दर्ज कर ली है। इसके बाद कांग्रेस के 16 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए, जबकि 17 निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी चुनावी मुकाबले के बिना जीत हासिल की है।
किसके खाते में कितनी सीटें?
- BJP – 44 सीटें
- कांग्रेस – 16 सीटें
- निर्दलीय – 17 सीटें
- कुल – 77 सीटें
इन आंकड़ों से साफ है कि निर्विरोध निर्वाचन के मामले में भाजपा सबसे आगे रही है। हालांकि, इसे पूरे निकाय चुनाव का अंतिम परिणाम नहीं माना जा सकता, क्योंकि बड़ी संख्या में वार्डों में अभी मतदान होना बाकी है।
31 जिलों के वार्डों में हुआ निर्विरोध निर्वाचन
राजस्थान के 31 जिलों में 77 वार्ड ऐसे रहे, जहां चुनावी मुकाबला मतदान से पहले ही खत्म हो गया। निर्विरोध निर्वाचन के मामले में डीग 10 वार्डों के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद चित्तौड़गढ़ में 6 और सीकर में 5 वार्डों में प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए। अलवर, झुंझुनूं, जोधपुर और खैरथल-तिजारा में 4-4 वार्डों का फैसला भी निर्विरोध हुआ।
महिलाओं की भी बड़ी हिस्सेदारी
77 निर्विरोध निर्वाचित पार्षदों में 37 महिलाएं हैं। इनमें BJP की 22, कांग्रेस की 8 और निर्दलीय 7 महिला उम्मीदवार शामिल हैं। यानी निर्विरोध चुने गए पार्षदों में करीब आधी हिस्सेदारी महिलाओं की है।
अब बाकी सीटों पर होगी वोटिंग
निर्विरोध निर्वाचन के बाद अब राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव की बाकी सीटों पर मतदान होगा। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक मतदान 9 और 11 सितंबर को दो चरणों में कराया जाएगा, जबकि 14 सितंबर को मतगणना होगी।
राजनीतिक मायने
मतदान से पहले 44 सीटों पर BJP की निर्विरोध जीत पार्टी के लिए निश्चित तौर पर शुरुआती बढ़त है। हालांकि, निकाय चुनावों में स्थानीय समीकरण, निर्दलीय उम्मीदवार और वार्ड स्तर की राजनीति का खास प्रभाव रहता है। इसलिए अंतिम तस्वीर मतदान और मतगणना के बाद ही पूरी तरह साफ होगी।