अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को सोशल मीडिया के माध्यम से ईरान को लेकर बड़ा राजनीतिक संकेत दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तेहरान के साथ अब किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं होगी और सभी प्रस्तावित बैठकों को रद्द कर दिया गया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया पहले से ही तनाव के दौर से गुजर रहा है, और अमेरिका-ईरान संबंध लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
व्हाइट हाउस में हाई-लेवल बैठक
ट्रंप के बयान के तुरंत बाद व्हाइट हाउस में शीर्ष अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें रक्षा मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और सैन्य प्रमुख शामिल हुए। बैठक का मुख्य एजेंडा ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों, रणनीतिक दबाव और क्षेत्रीय प्रभावों पर चर्चा करना रहा। यह बैठक संकेत देती है कि अमेरिका अब केवल चेतावनी तक सीमित नहीं रहना चाहता।
ईरान के अंदरूनी हालात पर अमेरिका की नजर
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को समर्थन दे सकता है। हाल के महीनों में ईरान में आर्थिक संकट और राजनीतिक असंतोष के चलते बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि मौजूदा हालात ईरान पर दबाव बनाने का अवसर प्रदान कर सकते हैं, हालांकि इससे हालात और विस्फोटक होने की आशंका भी जताई जा रही है।
ट्रंप के अपने खेमे में मतभेद
ईरान को लेकर ट्रंप के आक्रामक रुख पर उनके ही राजनीतिक खेमे में मतभेद उभर आए हैं। कई रिपब्लिकन नेताओं और वरिष्ठ सहयोगियों ने चेतावनी दी है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई अमेरिका को एक और लंबे और महंगे युद्ध में झोंक सकती है। उनका मानना है कि इससे न केवल पश्चिम एशिया अस्थिर होगा, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था और घरेलू राजनीति पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।
‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति पर उठे सवाल
आलोचकों का कहना है कि ईरान में सैन्य हस्तक्षेप ट्रंप की घोषित ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के खिलाफ जाता है। ट्रंप अपने चुनावी अभियानों में बार-बार विदेशों में चल रहे युद्धों से अमेरिका को बाहर निकालने की बात करते रहे हैं। ऐसे में ईरान के खिलाफ कार्रवाई उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर सकती है।
समर्थकों का तर्क और नैतिक दबाव
वहीं ट्रंप समर्थकों का तर्क है कि ईरान में हो रही हिंसा और प्रदर्शनकारियों की मौतों पर चुप रहना अमेरिका की वैश्विक नेतृत्व भूमिका को कमजोर करेगा। उनका मानना है कि यदि अमेरिका ने सख्त रुख नहीं अपनाया, तो यह संदेश जाएगा कि वह मानवाधिकार उल्लंघनों को नजरअंदाज कर रहा है।
वैश्विक असर और आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन का कोई भी फैसला पश्चिम एशिया की राजनीति, तेल बाजारों और वैश्विक सुरक्षा संतुलन पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। फिलहाल व्हाइट हाउस में सैन्य और सुरक्षा सलाहकार विभिन्न परिदृश्यों पर काम कर रहे हैं। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि अमेरिका वास्तव में सैन्य कार्रवाई की ओर बढ़ता है या दबाव की रणनीति तक ही सीमित रहता है।
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