नई दिल्ली/वॉशिंगटन:हृदय रोगों के उपचार में वैज्ञानिकों ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। अब तक ज्यादातर मामलों में हार्ट अटैक या स्ट्रोक आने के बाद ही मरीजों को अपनी बीमारी का पता चलता था। लेकिन अब 'जरनल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी' (JACC) में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, मात्र एक डीएनए (DNA) टेस्ट के जरिए दिल से जुड़ी 8 प्रमुख बीमारियों के जोखिम का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।
क्या है PRS तकनीक और यह कैसे काम करती है?
इस नई तकनीक का आधार 'पॉलीजेनिक रिस्क स्कोर' (Polygenic Risk Score - PRS) है। पारंपरिक जेनेटिक टेस्ट में केवल एक या दो खराब जीन की तलाश की जाती थी, लेकिन यह नया तरीका डीएनए में मौजूद लाखों जीन के छोटे-छोटे प्रभावों का एक साथ विश्लेषण करता है।
यह टेस्ट बताता है कि किसी व्यक्ति का जोखिम आम आबादी की तुलना में कितने प्रतिशत (Percentile) अधिक है।
यदि किसी व्यक्ति का स्कोर ऊपरी 10-20% श्रेणी में आता है, तो उसे अत्यंत उच्च जोखिम वाला माना जाता है।
इन 8 बीमारियों का लगेगा पता:
इस एक परीक्षण के डैशबोर्ड पर हृदय रोग और स्ट्रोक के लिए जिम्मेदार इन 8 प्रमुख समस्याओं का जोखिम दिखेगा:
1. कोरोनरी आर्टरी डिजीज (हृदय की धमनियों की बीमारी)
2. एट्रियल फाइब्रिलेशन (दिल की धड़कन का अनियमित होना)
3. टाइप 2 डायबिटीज
4. वेनस थ्रोम्बोम्बोलिज्म (नसों में रक्त का थक्का जमना)
5. थोरैसिक एओर्टिक एन्यूरिज्म
6. गंभीर उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन)
7. हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (अत्यधिक कोलेस्ट्रॉल)
8. लिपोप्रोटीन(ए) का उच्च स्तर
समय रहते बचाव संभव
शोध के अनुसार, लगभग 71% लोगों में कम से कम एक ऐसी बीमारी का जोखिम होता है जो सामान्य से तीन गुना अधिक है। इस टेस्ट का सबसे बड़ा लाभ यह है कि लक्षण दिखने से पहले ही चेतावनी मिल जाती है। शोधकर्ता डॉ. अनिरुद्ध पटेल के अनुसार, "कई बार सामान्य चेकअप में सब कुछ नॉर्मल दिखता है, लेकिन व्यक्ति आनुवंशिक (Genetically) रूप से जोखिम में होता है। इस जानकारी से मरीज समय रहते डाइट में बदलाव, व्यायाम या डॉक्टर की सलाह पर दवाएं शुरू कर हृदय रोगों को रोक सकते हैं।"
चेतावनी: यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय शोध पर आधारित है। किसी भी प्रकार के जेनेटिक टेस्ट या हृदय संबंधी उपचार के लिए विशेषज्ञ कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह अनिवार्य है।