कोलकाता डेस्क: दुर्गा पूजा का त्योहार पूजा-पाठ, खुशियों और स्वादिष्ट पकवानों के बिना अधूरा सा लगता है। खासकर अगर इस मौके पर घर में बनी पारंपरिक मिठाइयां खाने को मिल जाएं, तो त्योहार की खुशी और बढ़ जाती है। बंगाली मिठाइयां अपनी नरम बनावट और खास स्वाद के लिए पूरे देश में पसंद की जाती हैं। अगर आपको लगता है कि इन्हें घर पर बनाना मुश्किल है, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। कुछ आसान तरीकों की मदद से आप दुर्गा पूजा पर घर में ही बंगाल की मशहूर मिठाइयां बना सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसी ही 5 पारंपरिक मिठाइयों के बारे में।

रसमलाई से बढ़ाएं त्योहार की मिठास
रसमलाई बंगाल की सबसे पसंद की जाने वाली मिठाइयों में से एक है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले दूध फाड़कर ताजा छेना तैयार किया जाता है। छेने को अच्छी तरह मसलकर छोटी-छोटी चपटी गोलियां बनाई जाती हैं। इन्हें हल्की चाशनी में पकाया जाता है, जिससे ये नरम और स्पंजी हो जाती हैं। दूसरी तरफ दूध को धीमी आंच पर पकाकर गाढ़ा किया जाता है। इसमें चीनी, केसर, इलायची और कटे हुए बादाम-पिस्ता मिलाए जाते हैं। तैयार गाढ़े दूध में चाशनी से निकली छेने की टिक्कियां डालकर कुछ देर ठंडा करें। फ्रिज में ठंडी होने के बाद रसमलाई का स्वाद और भी बढ़ जाता है।
बंगाल की पुरानी मिठाई है सोंदेश
सोंदेश बंगाल की पारंपरिक और बेहद सरल मिठाइयों में शामिल है। इसे घर पर कम समय में आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसके लिए ताजा छेने में बारीक पिसी चीनी या गुड़ मिलाया जाता है। इस मिश्रण को धीमी आंच पर करीब दो से तीन मिनट तक पकाया जाता है, ताकि छेने का कच्चापन दूर हो जाए। मिश्रण थोड़ा ठंडा होने पर इसमें इलायची पाउडर मिलाएं। इसके बाद इसे हाथों से गोल या अपनी पसंद के आकार में तैयार किया जा सकता है। ऊपर से पिस्ता लगाकर इसे सजाएं। नरम और मुंह में घुल जाने वाला सोंदेश दुर्गा पूजा के लिए एक बढ़िया मिठाई है।

चमचम दिखने में सुंदर और स्वाद में लाजवाब
चमचम बंगाल की ऐसी मिठाई है जो देखने में भी आकर्षक लगती है और खाने में भी बेहद स्वादिष्ट होती है। इसे बनाने के लिए ताजा छेने को अच्छी तरह मसलकर चिकना किया जाता है। इसके बाद छेने से लंबे आकार के छोटे-छोटे रोल तैयार किए जाते हैं। इन रोल को उबलती हुई चाशनी में पकाया जाता है, जिससे इनका रंग हल्का पीला या नारंगी हो जाता है। अच्छी तरह पकने के बाद इन्हें चाशनी से निकालकर ठंडा किया जाता है। ऊपर से खोया डालकर और कद्दूकस किए नारियल से सजाया जा सकता है। दुर्गा पूजा के दौरान घर आए मेहमानों को परोसने के लिए चमचम एक खास मिठाई हो सकती है।
दुर्गा पूजा पर जरूर बनाएं मिष्टी दोई
बंगाली मिठाइयों की बात हो और मिष्टी दोई का नाम न आए, ऐसा मुश्किल है। मिष्टी दोई यानी मीठा दही बंगाल की खास पहचान वाली मिठाइयों में शामिल है। इसे बनाने के लिए दूध में चीनी या गुड़ डालकर तब तक पकाया जाता है, जब तक दूध काफी गाढ़ा न हो जाए। चीनी को हल्का कैरमेलाइज करके दूध में मिलाने से इसका रंग हल्का भूरा और स्वाद खास हो जाता है। दूध हल्का गुनगुना होने पर इसमें थोड़ा दही मिलाकर जमने के लिए रखा जाता है। इसे मिट्टी के बर्तन में करीब 7 से 8 घंटे तक गर्म जगह पर रखने से अच्छी तरह जम जाता है। रात में जमाने पर सुबह तक स्वादिष्ट और ठंडी मिष्टी दोई तैयार हो सकती है।
बंगाली घरों में शुभ माना जाता है पायेश
पायेश बंगाली घरों में खास मौकों और पूजा-पर्व पर बनाई जाने वाली पारंपरिक मिठाई है। इसे चावल से तैयार किया जाता है और यह स्वाद में खीर जैसी होती है। इसे बनाने के लिए फुल क्रीम दूध को अच्छी तरह उबाला जाता है। इसके बाद इसमें छोटे दाने वाले चावल और थोड़ा सा घी डालकर धीमी आंच पर पकाया जाता है। चावल के अच्छी तरह गलने और दूध के गाढ़ा होने के बाद इसमें चीनी या खजूर का गुड़ मिलाया जाता है। आखिर में इलायची, काजू और किशमिश डालकर इसे सजाया जाता है। दुर्गा पूजा के शुभ अवसर पर घर में बना पायेश त्योहार की मिठास को और बढ़ा सकता है।