आजकल फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल को लेकर जागरूक लोग अपने दिन की शुरुआत अक्सर ताजे फलों के रस से करते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में सोशल मीडिया और हेल्थ रिसर्च में यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि क्या फ्रूट जूस वास्तव में शरीर के लिए उतना फायदेमंद है, जितना माना जाता है। खासतौर पर डायबिटीज और ब्लड शुगर से जुड़े मामलों में इस पर नई चर्चाएं शुरू हुई हैं।
पोषण देता है, लेकिन तरीका भी मायने रखता है
विशेषज्ञों के अनुसारर फ्रूट जूस विटामिन और मिनरल्स का अच्छा स्रोत हो सकता है, लेकिन इसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति इसे कितनी मात्रा में और किस समय पी रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी भी खाद्य पदार्थ की तरह फ्रूट जूस का असर भी शरीर की जरूरत और संतुलन पर आधारित होता है।
साबुत फल और जूस में आखिर फर्क क्या है?
सबसे बड़ा अंतर फाइबर का होता है। साबुत फलों में मौजूद फाइबर शरीर में शुगर के अवशोषण की प्रक्रिया को धीमा करता है, जिससे ब्लड शुगर धीरे-धीरे बढ़ता है। वहीं जूस निकालने की प्रक्रिया में अधिकांश फाइबर हट जाता है। इसके बाद फल में मौजूद प्राकृतिक शर्करा सीधे रक्त में पहुंचने लगती है, जिससे इंसुलिन और ग्लूकोज़ का स्तर तेजी से बढ़ सकता है।
ग्लाइसेमिक इंडेक्स क्यों बढ़ाता है चिंता?
फ्रूट जूस का ग्लाइसेमिक इंडेक्स मध्यम से उच्च स्तर का माना जाता है। इसका मतलब है कि यह शरीर में जल्दी पचकर ग्लूकोज़ को तेजी से बढ़ा सकता है। एक गिलास जूस तैयार करने में कई फलों का इस्तेमाल होता है, जिसके कारण व्यक्ति अनजाने में काफी अधिक मात्रा में प्राकृतिक शर्करा का सेवन कर लेता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ सीमित मात्रा में सेवन की सलाह देते हैं।
क्या जूस पीने से सीधे डायबिटीज हो जाती है?
वैज्ञानिक अध्ययनों और मेटा-एनालिसिस में यह स्पष्ट हुआ है कि सीमित मात्रा में फ्रूट जूस पीने से सीधे तौर पर डायबिटीज नहीं होती। समस्या तब पैदा होती है, जब लोग जरूरत से ज्यादा जूस पीने लगते हैं या उसे संतुलित आहार का विकल्प बना लेते हैं। लगातार अत्यधिक शर्करा का सेवन शरीर के इंसुलिन संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
डायबिटीज मरीजों को क्या रखना चाहिए ध्यान?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि डायबिटीज या प्रीडायबिटीज से जूझ रहे लोगों को साबुत फल अधिक खाने चाहिए। यदि जूस पीना हो, तो उसकी मात्रा सीमित रखें और खाली पेट पीने से बचें। सक्रिय समय या हल्की शारीरिक गतिविधि के आसपास जूस लेना अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है। साथ ही पैकेज्ड और अतिरिक्त चीनी वाले जूस से दूरी बनाना जरूरी है।
संतुलन ही है सबसे सुरक्षित रास्ता
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फ्रूट जूस को पूरी तरह गलत ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन इसे हेल्दी समझकर असीमित मात्रा में पीना भी सही नहीं है। संतुलित आहार, पर्याप्त फाइबर, नियमित व्यायाम और नियंत्रित शुगर सेवन ही लंबे समय तक स्वस्थ जीवन की कुंजी माने जाते हैं।