कान्हा टाइगर रिजर्व के सरही फॉरेस्ट रेंज में बाघिन टी-141 और उसके चार शावकों की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में इनकी मौत का कारण केनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) पाया गया है। यही वायरस 2018 में गिर नेशनल पार्क में 34 शेरों की मौत का कारण बना था। यह खतरनाक वायरस कुत्तों से जंगली जानवरों में फैलता है।
जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख वेटरनरी यूनिवर्सिटी की जांच में सीडीवी की पुष्टि के बाद वन विभाग ने रिपोर्ट वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी को भेज दी है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जहां बाघिन और शावकों के शव मिले, उसके आसपास 2 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को क्वारंटाइन कर दिया गया है। साथ ही, क्षेत्र के जलस्रोतों को एक महीने के लिए बंद कर तारबंदी कर दी गई है, ताकि संक्रमित जानवरों की आवाजाही रोकी जा सके।
पीसीसीएफ (वाइल्डलाइफ) समीता राजौरा के अनुसार, आसपास के 8 गांवों में कुत्तों की पहचान कर उनका टीकाकरण शुरू कर दिया गया है। अब तक 103 कुत्तों की पहचान कर 94 को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। पूरे क्षेत्र में 40 ट्रैप कैमरों के जरिए निगरानी रखी जा रही है।
सरही क्षेत्र को फिलहाल पर्यटन के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। वहीं, पहले से ही एहतियात के तौर पर 84 गांवों में 12,734 पालतू पशुओं और 404 से अधिक कुत्तों का टीकाकरण किया जा चुका है।
पन्ना में भी बाघ की मौत का मामला सामने आया
पन्ना टाइगर रिजर्व के अमानगंज बफर क्षेत्र में 2 वर्षीय बाघ की मौत का मामला सामने आया है। उसका शव मंगलवार सुबह मिला। इस बाघ को 26 अप्रैल को ग्राम तारा के पास ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया गया था और रेडियो कॉलर लगाकर जंगल में छोड़ा गया था।
2026 में अब तक 32 बाघों की मौत
प्रदेश में वर्ष 2026 के दौरान अब तक 32 बाघों की मौत हो चुकी है। इनमें से 25 मौतें प्राकृतिक कारणों से, जबकि 7 मामले शिकार से जुड़े बताए गए हैं।