भोपाल. किसानों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने के अभियान में मध्य प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। 20 जुलाई 2026 तक राज्य में 1.14 करोड़ से अधिक फार्मर आईडी तैयार हो चुकी थीं, जिसके साथ मध्य प्रदेश देश में तीसरे स्थान पर रहा। इस सूची में उत्तर प्रदेश 2.44 करोड़ फार्मर आईडी के साथ पहले और महाराष्ट्र 1.35 करोड़ के साथ दूसरे स्थान पर था। खास बात यह है कि इन 3 राज्यों में ही देश में तैयार की गई कुल फार्मर आईडी का करीब 48.3% हिस्सा दर्ज किया गया था। इससे पता चलता है कि देश के बड़े कृषि राज्यों में किसानों को डिजिटल पहचान देने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज गति से आगे बढ़ रही है और मध्य प्रदेश इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
देश में 10.31 करोड़ से ज्यादा फार्मर आईडी
केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 3 अगस्त 2026 तक देशभर में 10.31 करोड़ से अधिक फार्मर आईडी बनाई जा चुकी थीं। इससे पहले 20 जुलाई तक देश में इन डिजिटल पहचानों की संख्या करीब 10.18 करोड़ थी। मध्य प्रदेश के बाद राजस्थान में 87.23 लाख, कर्नाटक में 64.44 लाख और गुजरात में 62.25 लाख फार्मर आईडी दर्ज की गई थीं। डिजिटल पहचान का यह विस्तार केवल आंकड़ों में बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि कृषि क्षेत्र को एक ऐसे डिजिटल ढांचे से जोड़ने की दिशा में कदम है, जहां किसान की पहचान, उसकी जमीन और कृषि संबंधी जानकारी को एकीकृत तरीके से इस्तेमाल किया जा सके। आने वाले समय में इसी व्यवस्था का इस्तेमाल सरकारी सहायता और कृषि सेवाओं को अधिक लक्षित बनाने में किया जा सकता है।
एग्रीस्टैक से जुड़ेगी किसान और जमीन की जानकारी
फार्मर आईडी को एग्रीस्टैक के तहत किसानों के विवरण और डिजिटाइज्ड भूमि अभिलेखों से जोड़ने की योजना है। एग्रीस्टैक को कृषि क्षेत्र का डिजिटल ढांचा माना जा रहा है, जिसमें किसान से जुड़ी अलग-अलग जानकारियों को एक व्यवस्थित प्लेटफॉर्म पर लाने की कोशिश की जा रही है। इसका उद्देश्य पीएम-किसान, फसल बीमा, न्यूनतम समर्थन मूल्य आधारित खरीदी, कृषि ऋण और कृषि आदानों जैसी सेवाओं तक किसानों की पहुंच को आसान बनाना है। इसके साथ ही मौसम संबंधी सलाह और प्राकृतिक आपदा की स्थिति में राहत पहुंचाने में भी इस डिजिटल पहचान का इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक अधिक सटीकता और कम कागजी प्रक्रिया के साथ पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
अब राज्यों की असली प्रतिस्पर्धा डिजिटल डेटा के इस्तेमाल में
फार्मर आईडी बनाने के बाद राज्यों के सामने अगली बड़ी चुनौती इस डिजिटल जानकारी का बेहतर उपयोग करने की है। अब मुकाबला केवल यह दिखाने का नहीं रहेगा कि किस राज्य ने कितने किसानों को डिजिटल पहचान दी, बल्कि यह महत्वपूर्ण होगा कि इस डेटा के जरिए किसानों को वास्तविक समय में कितना लाभ पहुंचाया जा सकता है। महाराष्ट्र ने एग्रीस्टैक का इस्तेमाल सरकारी योजनाओं के वितरण और एआई आधारित कृषि सलाह की दिशा में शुरू कर दिया है। इसका संकेत यह है कि कृषि क्षेत्र में डिजिटल पहचान अब केवल प्रशासनिक रिकॉर्ड नहीं रहना चाहती, बल्कि किसान के लिए मौसम, फसल और खेती से जुड़े निर्णयों में उपयोगी तकनीकी साधन बनने की ओर बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म कृषि नीति और किसान सेवाओं की दिशा बदल सकते हैं।
मध्य प्रदेश में एआई आधारित कृषि समाधान पर जोर
मध्य प्रदेश भी अब कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल की तैयारी तेज कर रहा है। इंदौर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में एग्रीहब के माध्यम से एआई, मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग आधारित कृषि समाधानों पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के साथ ऐसे स्टार्टअप और समाधान विकसित करना है, जिनका इस्तेमाल वास्तविक खेती की समस्याओं के समाधान में किया जा सके। यदि फार्मर आईडी और भूमि रिकॉर्ड जैसे डिजिटल डेटा को एआई आधारित तकनीकों से प्रभावी तरीके से जोड़ा जाता है, तो किसानों को फसल प्रबंधन, मौसम जोखिम और कृषि संबंधी निर्णयों में अधिक उपयोगी सलाह उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे मध्य प्रदेश के लिए डिजिटल कृषि को केवल सरकारी रिकॉर्ड की व्यवस्था से आगे ले जाकर तकनीक आधारित खेती का आधार बनाने का अवसर पैदा हो रहा है।
डिजिटल पहचान से स्मार्ट खेती तक का सफर
फार्मर आईडी अभियान को कृषि क्षेत्र के डिजिटल परिवर्तन की शुरुआती कड़ी के रूप में देखा जा सकता है। किसान की डिजिटल पहचान जब उसकी जमीन, फसल और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी के साथ एकीकृत होगी, तब कृषि सेवाओं को अधिक व्यक्तिगत और जरूरत आधारित बनाने की संभावना बढ़ेगी। भविष्य में यही डेटा एआई आधारित प्रणालियों के लिए आधार बन सकता है, जो किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सलाह देने में मदद करेंगी। हालांकि इसके लिए डेटा की शुद्धता, किसानों की जानकारी की सुरक्षा और डिजिटल सेवाओं तक ग्रामीण क्षेत्रों की आसान पहुंच सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी होगा। मध्य प्रदेश का 1.14 करोड़ फार्मर आईडी का आंकड़ा उसकी मजबूत शुरुआत को दर्शाता है, लेकिन असली सफलता तब मानी जाएगी जब यह डिजिटल पहचान किसानों की आय, जोखिम प्रबंधन और खेती की उत्पादकता में वास्तविक सुधार का माध्यम बने।