जबलपुर: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 में बीएड (B.Ed) डिग्री के आधार पर पात्रता का दावा करने वाली अभ्यर्थी की याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति पवन कुमार द्विवेदी की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि प्राथमिक शिक्षक पद के लिए केवल बीएड की डिग्री निर्धारित व्यावसायिक योग्यता का विकल्प नहीं हो सकती। नियमानुसार डीएलएड (D.El.Ed) या उसके समकक्ष निर्धारित योग्यता आवश्यक है। यह मामला जबलपुर निवासी अपूर्वा शर्मा से जुड़ा है, जिन्होंने चयन परीक्षा में सफलता हासिल की थी, लेकिन दस्तावेज सत्यापन के दौरान आवश्यक व्यावसायिक योग्यता नहीं होने के आधार पर उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया था।
MP हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 में शामिल हुईं अपूर्वा शर्मा ने बीएड डिग्री के आधार पर अपनी पात्रता का दावा किया था। हालांकि, दस्तावेज सत्यापन के दौरान उन्हें निर्धारित व्यावसायिक योग्यता पूरी नहीं करने के कारण अपात्र घोषित कर दिया गया।इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने प्राथमिक शिक्षक पद के लिए निर्धारित योग्यता से जुड़े नियमों पर विचार किया। एकलपीठ ने याचिका निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि केवल बीएड की डिग्री प्राथमिक शिक्षक पद के लिए निर्धारित आवश्यक व्यावसायिक योग्यता की जगह नहीं ले सकती।
B.Ed के बजाय D.El.Ed या समकक्ष योग्यता जरूरी
मामले में अदालत के सामने प्राथमिक शिक्षक पद के लिए आवश्यक शैक्षणिक और व्यावसायिक योग्यता का सवाल था। फैसले के अनुसार, प्राथमिक शिक्षक पद के लिए संबंधित भर्ती नियमों के तहत डीएलएड या समकक्ष निर्धारित व्यावसायिक योग्यता आवश्यक है।इस मामले में अभ्यर्थी के पास बीएड की डिग्री थी, लेकिन दस्तावेज सत्यापन के दौरान निर्धारित योग्यता पूरी नहीं होने के आधार पर उन्हें भर्ती के लिए अपात्र माना गया। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।
2018 में B.Ed, 2020 में पात्रता परीक्षा पास की थी
याचिकाकर्ता अपूर्वा शर्मा ने वर्ष 2018 में बीएड की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद वर्ष 2020 में उन्होंने प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की।वर्ष 2025 की प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा में सफल होने के बावजूद दस्तावेज सत्यापन के दौरान उनकी उम्मीदवारी पर रोक लग गई। विभाग ने आवश्यक व्यावसायिक योग्यता नहीं होने के आधार पर उन्हें अपात्र घोषित किया था। इसी निर्णय को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के नियमों का भी उठा मुद्दा
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग के भर्ती नियमों में शैक्षणिक योग्यता का उल्लेख अलग-अलग है। जनजातीय कार्य विभाग के नियमों में स्नातक के साथ बीएड का उल्लेख होने के आधार पर उन्होंने अपनी पात्रता का दावा किया था।हालांकि, अदालत ने याचिका खारिज कर दी। इस मामले में प्राथमिक शिक्षक पद के लिए लागू निर्धारित व्यावसायिक योग्यता महत्वपूर्ण रही।