भोपाल | उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ से पहले मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। महाकाल, ओंकारेश्वर, ओरछा और मैहर सहित प्रमुख मंदिरों में तिरुपति, अयोध्या और सोमनाथ की तर्ज पर नया मैनेजमेंट मॉडल लागू किया जा सकता है। इसका उद्देश्य दान और दर्शन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को बेहतर करना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर अधिकारियों की टीम देश के प्रमुख मंदिरों का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का अध्ययन कर चुकी है। टीम ने दान प्रणाली, दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा, क्राउड कंट्रोल, प्रसादम की गुणवत्ता और श्रद्धालुओं को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी जुटाई है। अब सरकार को हाई लेवल कमेटी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है। इसी रिपोर्ट के आधार पर नई व्यवस्था का खाका तैयार किया जाएगा।
तिरुपति की तर्ज पर होल्डिंग एरिया और स्लॉट बुकिंग
सरकार का विशेष जोर दर्शन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने पर है। इसके तहत तिरुपति की तर्ज पर होल्डिंग एरिया और स्लॉट बुकिंग जैसी व्यवस्थाओं पर विचार किया जा रहा है। इससे त्योहारों और विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने और लंबी कतारों को कम करने में मदद मिल सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव अप्रैल-मई के दौरान दक्षिण भारत के कुछ प्रमुख मंदिरों का भ्रमण कर चुके हैं। उन्होंने तिरुपति, मदुरै और अयोध्या की व्यवस्थाओं का उदाहरण देते हुए मध्यप्रदेश के प्रमुख मंदिरों में बेहतर प्रबंधन विकसित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद अधिकारियों की टीम को दूसरे राज्यों के मंदिरों की व्यवस्थाओं का अध्ययन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
सिंहस्थ से पहले पहले चरण में इन मंदिरों पर फोकस
उज्जैन में करीब डेढ़ साल बाद होने वाले सिंहस्थ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए सरकार सिंहस्थ से पहले ही प्रमुख धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाएं दुरुस्त करना चाहती है।
पहले चरण में उन मंदिरों को शामिल करने की तैयारी है, जहां सबसे अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं। इनमें शामिल हैं:
- उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर
- ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर
- ओरछा का रामराजा मंदिर
- मैहर का शारदा देवी मंदिर
- इंदौर का खजराना गणेश मंदिर
- सलकनपुर देवी धाम
- पहले चरण के बाद प्रदेश के अन्य प्रमुख मंदिरों के प्रबंधन में भी बदलाव किए जा सकते हैं।
दर्शन से दान तक, इन 5 व्यवस्थाओं पर रहेगा फोकस
1. दर्शन व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण: त्योहारों और विशेष अवसरों पर सुगम दर्शन के लिए बेहतर व्यवस्था विकसित की जाएगी। होल्डिंग एरिया और स्लॉट बुकिंग जैसे विकल्पों पर विचार होगा, ताकि भीड़ का दबाव कम किया जा सके।
2. पारदर्शी दान और डिजिटल ऑडिट: मंदिरों में मिलने वाले चढ़ावे, सोने-चांदी, गुप्त दान और ऑनलाइन डोनेशन के लेखा-जोखा को व्यवस्थित करने के लिए डिजिटल निगरानी प्रणाली विकसित करने की तैयारी है।
3. बुनियादी सुविधाएं: श्रद्धालुओं के ठहरने, शुद्ध पेयजल, स्वच्छता और गुणवत्तापूर्ण प्रसादम की व्यवस्था बेहतर बनाने पर जोर रहेगा।
4. सुरक्षा व्यवस्था: मंदिर परिसरों में सीसीटीवी निगरानी, प्रशिक्षित सुरक्षा गार्ड और प्रवेश-निकास की बेहतर व्यवस्था विकसित करने की योजना है, ताकि भीड़ के दौरान सुरक्षा और आवाजाही सुचारु रहे।
5. श्रद्धालुओं की सुविधा: दर्शन से लेकर मंदिर परिसर में उपलब्ध अन्य सुविधाओं तक प्रबंधन को व्यवस्थित किया जाएगा, जिससे बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।
मंदिरों की परंपरा और मर्यादा भी रहेगी सुरक्षित
धर्मस्व, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी के मुताबिक, सरकार को अधिकारियों की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट मिलने के बाद प्रस्ताव का ड्राफ्ट तैयार कर मंजूरी के लिए आगे बढ़ाया जाएगा। प्रमुख मंदिरों में चरणबद्ध तरीके से नया मैनेजमेंट मॉडल लागू करने की योजना है।
मंत्री के अनुसार, पूरी प्रक्रिया में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही मंदिरों की परंपराओं और धार्मिक मर्यादा को भी सुरक्षित रखा जाएगा।