लखनऊ - उत्तर प्रदेश के शहरों में ई-रिक्शा की लगातार बढ़ती संख्या और उससे पैदा हो रही ट्रैफिक जाम की समस्या पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर इस मुद्दे पर फैसला लेने का निर्देश दिया है। सरकार को तय करना होगा कि लखनऊ समेत उन शहरों में नए ई-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाई जाए या नहीं, जहां इनकी संख्या जरूरत से ज्यादा हो चुकी है।
लखनऊ में 1.33 लाख ई-रिक्शा चलने का दावा
सोमवार को जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस ए.के. चौधरी की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। यह याचिका वकील सूरज सिंह विसेन की ओर से दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि लखनऊ में करीब 1.33 लाख ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं। याचिका में दलील दी गई कि इनकी बढ़ती संख्या के कारण सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ रहा है और शहर के कई इलाकों में जाम की समस्या गंभीर हो रही है।
नए रजिस्ट्रेशन को सीमित करने पर विचार करे सरकार
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के तहत ऐसे क्षेत्रों में नए ई-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन को सीमित करने पर विचार करने को कहा है, जहां इनकी संख्या जरूरत से अधिक हो गई है।
अदालत का निर्देश है कि सरकार चार सप्ताह के भीतर इस संबंध में अपना निर्णय ले। इससे लखनऊ के साथ-साथ प्रदेश के दूसरे उन शहरों में भी ई-रिक्शा की संख्या नियंत्रित करने का रास्ता खुल सकता है, जहां इनके कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
रजिस्ट्रेशन फीस में छूट का मतलब नियमों से छूट नहीं
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की ओर से रजिस्ट्रेशन फीस में दी गई छूट का अर्थ यह नहीं है कि ई-रिक्शा को बिना रजिस्ट्रेशन सड़कों पर चलाने की अनुमति मिल गई है। अदालत ने मोटर वाहन नियम, 1998 के नियम 178 का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार के पास ई-रिक्शा की आवाजाही को नियंत्रित करने का अधिकार है। यानी रजिस्ट्रेशन फीस में राहत और वाहन के अनिवार्य पंजीकरण की शर्त को अलग-अलग समझना होगा।
अब सरकार के फैसले पर टिकी नजरें
हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद अब राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर ई-रिक्शा के नए रजिस्ट्रेशन को लेकर अपना रुख स्पष्ट करना होगा। खासतौर पर उन शहरों में, जहां ई-रिक्शा की संख्या और सड़क की क्षमता के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है।
हालांकि, अदालत ने फिलहाल नए रजिस्ट्रेशन पर सीधे रोक नहीं लगाई है, बल्कि सरकार को इस संबंध में विचार कर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। ऐसे में अब यह देखना होगा कि सरकार किन शहरों और किन इलाकों के लिए क्या व्यवस्था लागू करती है।