नई दिल्ली - भारतीय क्रिकेट टीम से बाहर चल रहे बल्लेबाज सरफराज खान ने एक बार फिर अपनी निराशा जाहिर की है। रेलवे के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मुकाबले के पहले दिन का खेल खत्म होने के बाद उन्होंने कहा कि अब सुबह उठते ही मन में यह सवाल आता है कि जब टीम इंडिया में मौका ही नहीं मिलना है, तो इतनी मेहनत करने का क्या फायदा। इसके बावजूद सरफराज अपनी पुरानी दिनचर्या के मुताबिक रोज सुबह 5 बजे उठकर अभ्यास कर रहे हैं और घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाने की कोशिश में जुटे हैं।
सुबह 5 बजे उठकर करते हैं अभ्यास
सरफराज ने बताया कि टीम इंडिया में वापसी की अनिश्चितता के बीच भी उन्होंने अपनी मेहनत और अभ्यास का सिलसिला नहीं छोड़ा है। वह रोज सुबह जल्दी उठते हैं और मैदान पर अभ्यास करने पहुंच जाते हैं। हालांकि, कई बार उनके मन में यह सवाल उठता है कि लगातार मेहनत करने के बावजूद अगर टीम में जगह नहीं मिल रही, तो आगे क्या रास्ता है। भारतीय टीम के लिए टेस्ट क्रिकेट खेल चुके सरफराज घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें राष्ट्रीय टीम में वापसी का इंतजार करना पड़ रहा है।
12 साल की उम्र में 439 रन बनाकर बटोरी सुर्खियां
सरफराज खान का क्रिकेट करियर बचपन से ही चर्चा में रहा है। मुंबई में जन्मे सरफराज को उनके पिता नौशाद खान ने क्रिकेट की ट्रेनिंग दी। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने हैरिस शील्ड स्कूल टूर्नामेंट में 439 रन की शानदार पारी खेली थी। इस प्रदर्शन ने उन्हें कम उम्र में ही सुर्खियों में ला दिया था।
इसके बाद उन्होंने मुंबई की जूनियर टीमों में जगह बनाई और भारतीय अंडर-19 टीम का हिस्सा बने। सरफराज ने 2014 और 2016 के अंडर-19 विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया। दोनों टूर्नामेंट को मिलाकर उनके नाम 566 रन दर्ज हैं। अंडर-19 विश्व कप में उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन ने भविष्य के बड़े बल्लेबाज के रूप में उनकी पहचान मजबूत की।
रणजी ट्रॉफी में रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन
सरफराज ने 2014 में मुंबई की ओर से प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया। घरेलू क्रिकेट में उन्होंने लगातार बड़े स्कोर बनाए और अपनी बल्लेबाजी से चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। 2019-20 रणजी ट्रॉफी सीजन में उन्होंने उत्तर प्रदेश के खिलाफ नाबाद 301 रन की पारी खेली। यह उनके प्रथम श्रेणी करियर का पहला तिहरा शतक था।
रणजी ट्रॉफी में लगातार शानदार प्रदर्शन के चलते सरफराज का प्रथम श्रेणी बल्लेबाजी औसत लंबे समय तक चर्चा में रहा। 2024 में ईरानी कप में रेस्ट ऑफ इंडिया के खिलाफ उन्होंने नाबाद 222 रन बनाए। वह ईरानी कप के इतिहास में दोहरा शतक लगाने वाले मुंबई के पहले बल्लेबाज बने। घरेलू क्रिकेट में उनके इसी प्रदर्शन ने भारतीय टेस्ट टीम के दरवाजे खोले।
आईपीएल में भी आजमाई किस्मत
सरफराज ने 2015 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के साथ आईपीएल करियर शुरू किया। कम उम्र में ही उन्होंने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से पहचान बनाई। इसके बाद वह पंजाब किंग्स और दिल्ली कैपिटल्स की टीमों का भी हिस्सा रहे। आईपीएल में उन्हें लगातार खेलने के अवसर नहीं मिले, लेकिन घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन जारी रहा। 2026 के आईपीएल सीजन में वह चेन्नई सुपर किंग्स की टीम से जुड़े।
टेस्ट डेब्यू पर लगातार दो अर्धशतक
घरेलू क्रिकेट में कई वर्षों तक शानदार प्रदर्शन करने के बाद सरफराज को फरवरी 2024 में भारतीय टेस्ट टीम में मौका मिला। उन्होंने राजकोट में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया। अपने पहले ही मुकाबले में उन्होंने दोनों पारियों में अर्धशतक लगाकर प्रभावित किया। पहली पारी में उन्होंने 62 और दूसरी पारी में नाबाद 68 रन बनाए।
इसके बाद अक्टूबर 2024 में न्यूजीलैंड के खिलाफ बेंगलुरु टेस्ट में सरफराज ने 150 रन की शानदार पारी खेली। यह उनके टेस्ट करियर का पहला शतक था। इस पारी ने दिखाया कि वह बड़े दबाव वाले मुकाबलों में भी लंबी पारियां खेलने की क्षमता रखते हैं।
पिता नौशाद खान से मिलती है हिम्मत
सरफराज ने अपने मुश्किल दौर में पिता नौशाद खान के योगदान का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब निराशा हावी होती है, तब अपने पिता को मेहनत करते देखकर उन्हें दोबारा आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। पिता का संघर्ष और क्रिकेट के प्रति समर्पण उन्हें फिर से मैदान पर उतरने का हौसला देता है। सरफराज के लिए परिवार का समर्थन इस कठिन दौर में बड़ी ताकत बना हुआ है।
भारतीय पिचों के खिलाड़ी समझे जाने की आशंका
सरफराज ने यह भी कहा कि उन्हें ऐसा महसूस होता है कि टीम मैनेजमेंट उनकी सेवाओं को मुख्य रूप से भारतीय परिस्थितियों और पिचों के लिए उपयोगी मानता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि चयनकर्ताओं ने उनसे इस बारे में सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा है।
फरवरी 2024 में टेस्ट डेब्यू करने वाले सरफराज ने अब तक भारत के लिए छह टेस्ट मैच खेले हैं। इन मुकाबलों में उन्होंने 371 रन बनाए हैं, जिसमें एक शतक और तीन अर्धशतक शामिल हैं। उनका सर्वोच्च स्कोर 150 रन है। उनके सभी टेस्ट मुकाबले भारतीय धरती पर हुए हैं।
चयन नहीं, प्रदर्शन पर रहेगा ध्यान
सरफराज का मानना है कि टीम में चयन करना उनके हाथ में नहीं है। वह अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने और घरेलू क्रिकेट में रन बनाने पर ध्यान देते रहेंगे। उनके बयान से साफ है कि टीम इंडिया में वापसी की इच्छा के साथ-साथ चयन को लेकर निराशा भी उनके मन में है, लेकिन उन्होंने मेहनत जारी रखने का इरादा नहीं छोड़ा है।