भोपाल. रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन लक्ष्य को पूरा करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसानों की सुविधा और खरीदी प्रक्रिया को सुचारु बनाने के उद्देश्य से कई अहम निर्णय लिए हैं। सरकार का मानना है कि समय पर भंडारण व्यवस्था मजबूत किए बिना उपार्जन लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है।
गोदामों को मिली अतिरिक्त क्षमता इस्तेमाल की छूट
राज्य सरकार ने उन जिलों में विशेष अनुमति जारी की है जहां गेहूं खरीदी लक्ष्य के मुकाबले भंडारण की कमी सामने आ रही है। ऐसे जिलों में अब गोदामों की लाइसेंसी क्षमता का 120 प्रतिशत तक उपयोग किया जा सकेगा। इस फैसले से खरीदी केंद्रों पर अनाज के तेजी से उठाव और सुरक्षित भंडारण में मदद मिलेगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे किसानों को अपनी उपज रखने में होने वाली परेशानी काफी हद तक कम होगी।
किसानों को नहीं होगी उपज रखने की दिक्कत
अक्सर खरीदी सीजन के दौरान सीमित भंडारण क्षमता के कारण किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ता था। कई बार खुले में अनाज रखने की स्थिति बन जाती थी, जिससे गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा रहता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसानों की उपज का तत्काल भंडारण संभव हो सकेगा। इससे न केवल किसानों का समय बचेगा बल्कि अनाज की सुरक्षा भी बेहतर तरीके से सुनिश्चित हो पाएगी।
जरूरत पड़ने पर अन्य जिलों में भी लागू होगा नियम
सरकार ने साफ किया है कि यदि भविष्य में अन्य जिलों में भी इसी प्रकार की शॉर्टफॉल स्थिति बनती है तो वहां भी गोदामों को 120 प्रतिशत क्षमता तक उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार त्वरित निर्णय लें और उपार्जन व्यवस्था में किसी प्रकार की बाधा न आने दें। यह लचीली नीति सरकार की किसान केंद्रित सोच को दर्शाती है।
उपार्जन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी
राज्य सरकार गेहूं खरीदी को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी निगरानी और लॉजिस्टिक व्यवस्था पर भी जोर दे रही है। खरीदी केंद्रों पर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ परिवहन और भंडारण व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है तो आने वाले वर्षों में अन्य कृषि उपजों के लिए भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जा सकती है।
किसान हित में बड़ा कदम माना जा रहा फैसला
कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकार इस फैसले को किसानों के हित में उठाया गया बड़ा कदम मान रहे हैं। बढ़ती उपज और रिकॉर्ड खरीदी के बीच भंडारण क्षमता बढ़ाने का यह निर्णय राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा सकता है। सरकार को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से गेहूं खरीदी प्रक्रिया तेज होगी और किसानों को आर्थिक रूप से सीधा लाभ मिलेगा।