उज्जैन | उज्जैन के प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मंदिर का मुख्य ढांचा हटाए जाने के करीब डेढ़ महीने बाद मंगलवार देर रात लगभग 12 बजे भोपाल से आई तकनीकी विशेषज्ञों की टीम मंदिर पहुंची। टीम ने एसडीएम लक्ष्मीनारायण गर्ग की मौजूदगी में आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक मशीनों से हनुमान जी की मूर्ति और उसके बेस की स्कैनिंग की। हालांकि, इस जांच का उद्देश्य क्या था और रिपोर्ट के आधार पर आगे क्या कार्रवाई होगी, इसे लेकर प्रशासन की ओर से अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
मूर्ति और बेस की गहराई जानने के लिए हुई स्कैनिंग
तकनीकी टीम ने मूर्ति के आसपास विशेष उपकरण लगाकर स्कैनिंग की। बताया जा रहा है कि जांच के जरिए मूर्ति के बेस की वास्तविक गहराई और उसकी संरचनात्मक स्थिति का पता लगाने का प्रयास किया गया। करीब डेढ़ महीने से मंदिर का मामला शांत था, लेकिन देर रात तकनीकी टीम के पहुंचने के बाद मूर्ति की सुरक्षा, उसके आधार और भविष्य में संभावित कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल प्रशासन ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि जांच किस विभाग के निर्देश पर कराई गई। तकनीकी रिपोर्ट में क्या सामने आया है और इसका मंदिर की आगे की व्यवस्था से क्या संबंध है, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की गई है
सड़क चौड़ीकरण की जद में आया था मंदिर
उज्जैन में कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इस परियोजना की जद में खड़े हनुमान मंदिर सहित कई मकान, दुकानें और धार्मिक स्थल आए हैं। बताया गया है कि इस मार्ग पर चौड़ीकरण के लिए नगर निगम प्रशासन 172 मकान-दुकानों और करीब 10 धार्मिक स्थलों को हटाने या शिफ्ट करने की कार्रवाई कर चुका है। इसी प्रक्रिया के तहत करीब डेढ़ महीने पहले खड़े हनुमान मंदिर का मुख्य ढांचा भी हटा दिया गया था। हालांकि, मंदिर की मूर्ति को नहीं हटाया जा सका था। इसके बाद से मूर्ति और उसके आधार को लेकर आगे की कार्रवाई पर स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
रात में जांच को लेकर पार्षद ने उठाए सवाल
मंगलवार देर रात बिना किसी सार्वजनिक सूचना के तकनीकी टीम के पहुंचने और स्कैनिंग किए जाने पर भाजपा पार्षद शिवेंद्र तिवारी ने सवाल उठाए हैं। स्थानीय स्तर पर भी यह जानने की उत्सुकता है कि मूर्ति की स्कैनिंग किस उद्देश्य से कराई गई और इसके बाद प्रशासन क्या कदम उठाएगा। अब सबकी नजर तकनीकी जांच की रिपोर्ट और प्रशासन के अगले फैसले पर है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि मूर्ति के बेस की संरचनात्मक स्थिति को लेकर क्या निष्कर्ष निकले हैं और मंदिर के संबंध में आगे की योजना क्या होगी।