शरद पवार ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि, विरोधियों को डराने के लिए सरकार ईडी जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने आगे ईडी को बीजेपी का ‘सहयोगी दल’ बताया। पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री ने दावा किया कि, संघीय जांच एजेंसी ने इस दौरान 5,806 मामले दर्ज किए और उनमें से केवल 25 का निस्तारण किया। पवार ने कहा कि, मामलों के निस्तारण की दर 0.42 प्रतिशत तथा दोषसिद्धि की दर महज 0.40 प्रतिशत है। ईडी का बजट 2022 में 300 करोड़ रुपये से बढ़कर 404 करोड़ रुपये हो गया है।
क्या बीजेपी सरकार में ईडी की कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है?
पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री पवार ने आगे कहा कि, 2005 से 2023 के बीच 2 सरकारें सत्ता में रहीं जिसमें संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) भी शामिल है जिसका हम हिस्सा थे। संप्रग सरकार में ईडी ने 26 नेताओं की जांच की जिनमें से 5 कांग्रेस के और 3 बीजेपी के थे। उन्होंने आगे कहा कि, यह दिखाता है कि, संप्रग सरकार में ईडी की कार्रवाई राजनीति से प्रेरित नहीं थी लेकिन 2014 के बाद एक भी बीजेपी नेता की जांच नहीं की गई। ये आंकड़े शक पैदा करते हैं कि, क्या बीजेपी सरकार में ईडी की कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है। यह दर्शाता है कि ईडी, बीजेपी का सहयोगी दल बन गई।
शरद पवार का बीजेपी पर आरोप
उन्होंने आगे यह भी दावा किया कि, भाजपा नेताओं को पहले से ही ईडी की कार्रवाई के बारे में पता होता है। ऐसा लगता है कि, बीजेपी आदेश देती है। पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री पवार ने आरोप लगाया कि, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के नेतृत्व में संप्रग सरकार के दौरान ईडी का दुरुपयोग नहीं किया गया, लेकिन अब विपक्षी नेताओं के बीच डर पैदा करने के लिए एजेंसी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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