चुनाव आयोग ने 18वीं लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही देश में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। ये चुनाव 7 चरणों में होंगे। पहले चरण की वोटिंग 19 अप्रैल एवं आखिरी चरण की वोटिंग 1 जून को होगी। मतगणना 4 जून को होगी। हर बार की तरह इस बार भी मतदान एवं मतगणना की यह पूरी प्रक्रिया ईवीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से संपन्न की जाएगी।
भारत में ईवीएम की शुरुआत
देश में सबसे पहली बार ईवीएम का इस्तेमाल वर्ष 1982 में केरल राज्य से किया गया था। इसका आविष्कार दो साल पहले 1980 में एमबी हनीफा ने किया था। उन्होंने इसका पंजीयन 'इलेक्ट्रानिक संचालित मतगणना मशीन' के नाम से 15 अक्टूबर 1980 को करवाया था। हनीफा ने इस मशीन के मूल डिजाइन को तमिलनाडु के छह नगरों में लगने वाली प्रदशर्नियों में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए भी रखा था।
ईवीएम (EVM) से वोटिंग के लाभ
ईवीएम से मतदान की प्रक्रिया आसान होती है। मतदाता को अपना वोट देने के लिए महज एक बटन दबाने की दरकार होती है।
ईवीएम को एक से दूसरे स्थान पर ले जाना भी आसान होता है जो कि बैलेट बॉक्स के मुकाबले सुगम होता है।
बैलेट पेपर से जब वोटिंग होती थी जो कागजों पर बहुत धन खर्च होता था। कागजों की खपत भी बहुत बढ़ जाती थी। इसका असर पर्यावरण पर भी पड़ता था। ईवीएम के उपयोग से वोटिंग के दौरान होने वाले कागजों के अपव्यय पर भी अंकुश लगता है।
आर्थिक तौर पर बात करें तो ईवीएम का प्रयोग किफायती भी होता है। बैलेट पेपर की तुलना में इसमें खर्च कम आता है। ये मशीनें बैटरी से चलती हैं इसलिए बिजली का भी खर्च कम आता है।
मतगणना के समय वोटों की गिनती का काम इससे तेजी से होता है। मैन्युअली गणना में कई दिन लग जाते थे, उसकी तुलना में ईवीएम से कुछ ही घंटों में परिणाम सामने आ जाता है।
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