West Bengal - पंजाब के फतेहगढ़ साहिब से कांग्रेस पार्टी की भारत जोड़ो यात्रा शुरू हुई। इससे पहले, पार्टी सांसद राहुल गांधी सुबह फतेहगढ़ साहिब में माथा टेका, राहुल गांधी ने लाल रंग की पगड़ी पहनकर माथा टेका। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा अपने अंतिम पड़ाव पर है और उधर बंगाल West Bengal) में पूरी कांग्रेस ही गायब हो गई है।
विधानसभा चुनाव के 20 बाद भी पार्टी में फेरबदल नहीं
आपको ये जानकर बड़ी हैरानी होगी कि, पश्चिम बंगाल (West Bengal) में विधानसभा चुनाव को तकरीबन 20 महीने हो चुके हैं। इस चुनाव में कांग्रेस की बुरी ही तरह से हार हुई थी। इस करारी हार के बाद कांग्रेस पार्टी में फेरबदल की बात की गई थी। लेकिन अभी तक अमल में नहीं आ पाया। आपको बता दें कि, प्रदेश की बागडोर विधानसभा चुनाव में पहले कांग्रेस के सीनियर नेता अधीर रंजन चौधरी को दी गई थी।
चुनाव में हुई करारी हार के बाद अधीर रंजन ने अपना इस्तीफा हाईकमान को दिया था। हालाकि, हाईकमान ने उनका इस्तीफा होल्ड कर दिया था। बता दें कि, 2021 में हार के बाद से कई नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है। जिला स्तर पर भी बहुत से नेता निष्क्रिय हो गए है, इसके बाद भी प्रदेश में संगठन का विस्तार नहीं हो पाया हैं।
कांग्रेस का बंगाल (West Bengal) में सफाया होने ही 2 बजह
1 अधीर रंजन के अलावा कोई बड़ा चेहरा नहीं
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के पास अधीर रंजन चौधरी के अलावा अब तक कोई भी बड़ा चेहरा नहीं हैं। आपको बता दें कि, साल 2020 में पार्टी की सीनियर नेता सोमेन मित्रा के निधन के बाद सोनिया गांधी ने अधीर रंजन चौधरी को बंगाल में बड़ी जिम्मेदारी दी थी, लेकिन साल 2021 के चुनाव में ममता की ऐसी आंधी चली की अधीर भी फेल हो गए। जिस कांग्रेस को 2016 में 42 सीटें जीतने में कामयाबी हासिल हुई थी, वहीं 2021 में 0 पर सिमट गई।
2 ममता बनर्जी मजबूत और BJP का उदय
साल 2019 के पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC की लड़ाई कांग्रेस और वाममोर्चा के गठबंधन के साथ थी, लेकिन 2019 और 2021 के चुनाव में बीजेपी ने मजबूती के साथ लड़ाई लड़ी और कांग्रेस से विपक्ष का दर्जा भी छीन लिया।
लंबे समय से प्रदेश में अध्यक्ष और प्रभारी ही नहीं
कांग्रेस ने लंबे समय से प्रदेश में अध्यक्ष और प्रभारी ही नहीं बनाए। दिसंबर 2021 में ए चेल्लाकुमार को अंतिरम प्रभारी बनाया गया था, जबकि, उनके पास पहले से ही 2 राज्य थे। वहीं कांग्रेस के सीनियर नेता अधीर रंजन चौधरी के पास भी लोकसभा में कांग्रेस नेता का पद है, ऐसे में प्रदेश संगठन के विस्तार नहीं होने की बड़ी वजह फुलटाइम अध्यक्ष और प्रभारी का नहीं होना है।
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