नई दिल्ली, भारत का 'चिकन नेक' एक बार फिर चर्चा में है। वही 'चिकन नेक' जिसके बारे में अब जेल में बंद शरजील इमाम ने अपने एक बहुचर्चित और भड़काऊ भाषण में वहां रेलवे ट्रैक और सड़कों को मलबे से पाटकर नॉर्थ ईस्ट को भारत से काटने की बात कही थी। लेकिन रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण ये संकरी भूमि पट्टी इस बार चर्चा में है पड़ोसी देश बांग्लादेशकी चालबाजियों की वजह से। भारत के शौर्य से जिस देश का दुनिया के नक्शे पर उदय हुआ, वही देश अब उसके अहसानों को भूलकर 'चिकन नेक' के करीब तक पाकिस्तानी सेना और आईएसआई को पहुंच दे रहा है।
क्या है 'चिकन नेक'?
सिलिगुड़ी को भारत का 'चिकन नेक' कहा जाता है। ये नाम उसके आकार के मद्देनजर मिला है जो किसी मुर्गी की गर्दन की तरह दिखता है। 'चिकन नेक' अपनी भौगोलिक स्थिति की वजह से रणनीतिक और भू-राजनैतिक तौर पर बहुत ज्यादा महत्व रखता है। वैसे है तो ये जमीन की एक संकरी पट्टी ही, लेकिन यही नॉर्थ ईस्ट के राज्यों को भारत के बाकी हिस्से से जोड़ता है। इसकी लंबाई 60 किलोमीटर और चोड़ाई करीब 22 किलोमीटर है। कुछ जगहों पर इसकी चौड़ाई महज 17 किलोमीटर है। सिलिगुड़ी कॉरिडोर तीन देशों से घिरा हुआ है। ये देश हैं- नेपाल, भूटान और बांग्लादेश। ये न सिर्फ नॉर्थ ईस्ट के राज्यों को बाकी देश से जोड़ता है बल्कि चीन से लगे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के संवेदनशील जोन तक मिलिट्री ट्रांसपोर्ट के लिहाज से भी बहुत अहम है।
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