मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 की शुरुआत परंपरागत रूप से छह छंदों में वंदे मातरम् गान के साथ हुई, लेकिन शुरुआती औपचारिकता के बाद सदन का वातावरण तेजी से राजनीतिक तनाव में बदल गया। राज्यपाल मंगुभाई पटेल जैसे ही अभिभाषण पढ़ने लगे, विपक्षी विधायकों की नाराजगी और नारेबाजी ने माहौल को पूरी तरह बदल दिया। सत्र के पहले दिन हुई तीखी गतिरोध ने संकेत दे दिया कि यह बजट सत्र केवल संख्याओं और योजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजनीतिक टकराव का केंद्र बनेगा।
सरकार की उपलब्धियों और ‘अमृत काल’ विजन पर विस्तृत फोकस
राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में सरकार की उपलब्धियों, विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की प्रगति का उल्लेख प्रमुखता से किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘अमृत काल’ विजन का हवाला देते हुए वर्ष 2047 तक मध्यप्रदेश को 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य दोहराया। भाषण में बुनियादी ढांचे के विस्तार, कृषि सुधारों, निवेश वृद्धि, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और ‘संकल्प पत्र 2023’ के क्रियान्वयन परिणामों को विस्तार से रखा गया। सरकार के अनुसार इन योजनाओं ने राज्य को विकास के नए पायदान पर खड़ा किया है।
विपक्ष का तीखा विरोध और गंभीर मुद्दों पर सवाल
राज्यपाल का अभिभाषण जारी ही था कि नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने नल-जल योजना में अनियमितताओं और इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का मुद्दा उठाकर सदन में हलचल पैदा कर दी। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इन संवेदनशील और जनजीवन से जुड़े गंभीर मामलों का अभिभाषण में उल्लेख नहीं किया गया, जो सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है। इसके बाद विपक्षी विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी और लगातार विरोध से कार्यवाही अवरुद्ध होती रही।
हंगामे के बीच पूरा हुआ अभिभाषण, अध्यक्ष ने पढ़ा गया मान लिया
लगातार शोर-शराबे और विरोध के बावजूद राज्यपाल ने अपना अभिभाषण पूरा किया और इसके बाद सदन से प्रस्थान किया। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने शेष अभिभाषण को पढ़ा हुआ मानने की घोषणा की। हालांकि सदन में पैदा हुए शोर और अव्यवस्था ने यह स्पष्ट कर दिया कि राजनीतिक संवाद सहमति की दिशा में नहीं, बल्कि टकराव की ओर झुकता दिख रहा है।
कार्यवाही स्थगित, आने वाले दिनों में गर्मागर्मी तय
राज्यपाल के प्रस्थान और अभिभाषण पूरा मानने के बाद सदन की कार्यवाही अगले दिन तक स्थगित कर दी गई। बजट सत्र 6 मार्च तक चलेगा और पहले दिन के घटनाक्रम ने साफ संकेत दे दिए हैं कि आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच बहस और अधिक तीखी तथा टकरावपूर्ण हो सकती है। विकास योजनाओं, जनहित के मुद्दों और सरकारी जवाबदेही को लेकर सदन में कई बार गर्म माहौल बनना तय है।
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