केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित 18,662 करोड़ रुपये की इस परियोजना ने असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को नई दिशा दे दी है। ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनने वाली यह देश की पहली और दुनिया की दूसरी अंडरवॉटर सड़क-सह-रेल सुरंग होगी, जो गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच तेज, सुरक्षित और आधुनिक कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। यह परियोजना न केवल तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत की क्षमता को दर्शाती है, बल्कि पूर्वोत्तर राज्यों के लिए आर्थिक संभावनाओं के नए द्वार भी खोलती है।
गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच दूरी और समय में होगा भारी सुधार
फिलहाल नुमालीगढ़ और गोहपुर के बीच लगभग 240 किलोमीटर की दूरी तय करने में छह घंटे का समय लगता है। यह मार्ग काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और कई शहरी क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जिससे यात्रा समय और यातायात दोनों प्रभावित होते हैं। नई सुरंग और चार-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के निर्माण के बाद यात्रा का समय काफी कम होगा और ब्रह्मपुत्र के दोनों किनारों के बीच आवागमन अत्यंत सुगम हो जाएगा।
सुरंग परियोजना का स्वरूप और उसकी तकनीकी विशिष्टताएँ
राष्ट्रीय राजमार्ग-15 के अंतर्गत विकसित की जाने वाली यह परियोजना इंजीनियरिंग-खरीद-निर्माण मॉडल पर पूरी की जाएगी। सड़क और रेल, दोनों के लिए समानांतर सुरंगों का निर्माण एक रणनीतिक और तकनीकी उपलब्धि होगी जो भारत को वैश्विक मानकों की श्रेणी में स्थापित करेगी। यह आधुनिक कनेक्टिविटी अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के लिए भी बड़ा लाभदायक कदम साबित होगी।
पूर्वोत्तर राज्यों की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को नई रफ्तार
यह परियोजना पूर्वोत्तर के आर्थिक ढाँचे को मजबूती प्रदान करेगी। इससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी, व्यापार की गति बढ़ेगी और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। सुरंग और ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के माध्यम से कुल 11 आर्थिक केंद्रों, तीन सामाजिक केंद्रों, दो पर्यटन केंद्रों और आठ प्रमुख रसद केंद्रों से निर्बाध संपर्क सुनिश्चित होगा। साथ ही यह चार बड़े रेलवे स्टेशनों, दो हवाई अड्डों और दो अंतर्देशीय जलमार्गों से भी कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगी।
रणनीतिक महत्व और भविष्य की संभावनाएँ
परियोजना के पूर्ण होने पर यह क्षेत्र न केवल राष्ट्रीय दृष्टि से, बल्कि रणनीतिक रूप से भी अधिक मजबूत होगा। तेज़ परिवहन, बेहतर समन्वय और बहु-मॉडल कनेक्टिविटी से यह सुरंग भारत के पूर्वोत्तर में विकास और सुरक्षा दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी। यह परियोजना व्यापार, पर्यटन, उद्योग और सामाजिक संरचना को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
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