नई दिल्ली, भारत के आगामी गणतंत्र दिवस परेड में दिव्यास्त्र, जोरावर जैसी हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन किया जाएगा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए डिजाइन और विकसित किए गए अग्रणी हथियार प्रणालियों को सबके सामने दिखाया जाएगा, जो भारत की ताकत को बताएगा। डीआरडीओ की झांकी में लंबी दूरी की हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल, हल्के वजन की बुलेट प्रूफ जैकेट 'अभेद्य', एकसाथ कई ठिकानों को तबाह करने वाले दिव्यास्त्र, लाइट टैंक और रडार यानी 'जोरावर', इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम परेड में शामिल होंगे।
गणतंत्र दिवस परेड में होंगे ये रक्षा कवच
गणतंत्र दिवस परेड में त्वरित प्रतिक्रिया देने वाली सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम, 155 मिमी/52 कैल एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम, ड्रोन का पता लगाना, रोकना और नष्ट करने वाले उपकरण भी दिखेंगे। इनके अलावा, सैटेलाइट आधारित निगरानी प्रणाली, मध्यम शक्ति रडार अरुध्रा, उन्नत हल्के वजन वाले टारपीडो, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली धराशक्ति, स्वदेशी सुरक्षित सैटेलाइट फोन और यूजीआरएएम असॉल्ट राइफलें भी नजर आएंगी।
क्या है MIRV तकनीक, जिससे टेंशन में पड़ोसी
MIRV का अर्थ है मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल्स। यह तकनीक एक मिसाइल को परमाणु हथियारों सहित अनेक हथियारों को ले जाने की अनुमति देती है, जिनमें से हर हथियार को अलग-अलग लक्ष्यों पर निशाना लगाने में सक्षम बनाया गया है। मिशन दिव्यास्त्र के तहत भारत की इस एमआईआरवी तकनीक वाली मिसाइल को डीआरडीओ ने तैयार किया है। यह प्रणाली स्वदेशी एवियोनिक्स सिस्टम और उच्च सटीकता सेंसर पैकेज से लैस है। जो यह सुनिश्चित करती है कि मिसाइलें सटीकता से लक्ष्य तक पहुंचें और दुश्मन की मिसाइलों को रास्ते में ही मार गिराएं। यही वजह है कि पड़ोसी पाकिस्तान और चीन टेंशन में हैं।
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