दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आए हुए पांच दिन हो गए हैं. मगर, बीजेपी अपने नए सीएम के नाम पर मुहर नहीं लगा सकी. अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के सत्ता से बाहर होने के बाद दिल्ली का अगला सीएम कौन होगा, इसे लेकर बीजेपी में बैठकों का दौर जारी है. 16 फरवरी को बीजेपी विधायक दल की बैठक में ही नए मुख्यमंत्री का नाम फाइनल हो जाएगा लेकिन बीजेपी को ऐसे चेहरे की तलाश है, जो दिल्ली के सियासी मिजाज में फिट बैठता हो और ब्रांड केजरीवाल को सियासी टक्कर दे सके.
दिल्ली के नए मुख्यमंत्री को लेकर बीजेपी में लगातार मंथन चल रहा है. बीजेपी की इच्छा है कि दिल्ली में किसी धाकड़ चेहरे को मुख्यमंत्री के लिए चुना जाए, जिसका अपना सियासी मर्तबा और राजनीतिक रसूख भी हो. दिल्ली में बीजेपी की सरकार रही हो या फिर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की, लेकिन सत्ता की बागडोर हमेशा ऐसे नेता के हाथ में रही है, जिसका सियासी कद ऊंचा रहा है. ऐसे में अब देखना है कि बीजेपी अपना नया सीएम किसे चुनती है?
CM चेहरे की तलाश कितनी बड़ी चुनौती
दिल्ली में बीजेपी 27 साल बाद सत्ता में लौटी है तो उसके सामने चैलैंज भी बहुत बड़ा है. इसीलिए चुनाव नतीजे आने के पांच दिन बाद भी बीजेपी अपने सीएम का फैसला नहीं कर सकी. बीजेपी 48 सीटों के साथ सत्ता में लौटी है, जिसके बाद पार्टी के कई नेता सीएम की रेस में शामिल हैं. ऐसे में बीजेपी चाहती है कि दिल्ली की गद्दी पर एक ऐसा शख्स बैठे जो उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की तर्ज पर ही तेज तर्रार हो ताकि भविष्य में भी केजरीवाल के लिए चुनाव जीत पाना मुश्किल हो जाए. इसीलिए बीजेपी दिल्ली में सत्ता की बागडोर सौंपने के लिए एक मजबूत नेता की तलाश में है.
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ इस वक्त पीएम नरेंद्र मोदी के बाद बीजेपी के सबसे ज्यादा चर्चित चेहरे के रूप में जाने जाते हैं. हिंदुत्व के चेहरे के रूप में वो बीजेपी के बड़े ब्रॉन्ड हैं. साथ ही सीएम के रूप में उनके सख्त फैसले भी काफी ज्यादा पसंद किए जाते हैं. दिल्ली में अरविंद केजरीवाल को चारों खाने चित करने के लिए बीजेपी को किसी ऐसे ही चेहरे की तलाश है, लेकिन चेहरा ऐसा जो हिंदुत्व का चेहरा होने के बजाय विकास मॉडल का चेहरा बन सके. दिल्ली में बीजेपी की हिंदुत्व वाली सियासत ज्यादा कारगर नहीं रही है.
ब्रांड केजरीवाल के सामने मजबूत चेहरा
दिल्ली के सीएम रहते हुए अरविंद केजरीवाल ने अपने काम से अपनी सियासी छवि बनाई थी. ब्रांड केजरीवाल के दम पर आम आदमी पार्टी दिल्ली में दो बार बीजेपी को शिकस्त देने में भी सफल रही और उसके नाम पर राष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान बनाई. 2025 में ब्रांड मोदी के सहारे बीजेपी ब्रांड केजरीवाल को दिल्ली में सियासी धूल चटाने में कामयाब रही. ऐसे में सीएम के लिए बीजेपी को ऐसे चेहरे की तलाश है, जो दिल्ली में ब्रांड केजरीवाल की राजनीति को काउंटर कर सके. ऐसे में बीजेपी दिल्ली के मुख्यमंत्री के लिए मजबूत चेहरे की तलाश में है, जो पार्टी को मजबूती के साथ राजधानी की सियासत में जमाए रखे.
दिल्ली के सियासी मिजाज में भी फिट बैठे
बीजेपी दिल्ली के मुख्यमंत्री के लिए ऐसे चेहरे की तलाश में है, जो राजधानी के सियासी मिजाज में भी फिट बैठ सके. दिल्ली में अलग-अलग जाति और अलग-अलग क्षेत्र से लोग आकर बसे हैं. इस चुनाव में सवर्ण जातियों से लेकर पंजाबी और जाट-गुर्जर समुदाय ने बीजेपी की झोली वोट से भर दी. दिल्ली में पूर्वांचल से लेकर उत्तराखंड के लोग बड़ी संख्या में हैं, जिन्होंने बीजेपी को एकमुश्त वोट दिया है. दिल्ली में बीजेपी का कोर वोटबैंक पंजाबी और सवर्ण रहे हैं, लेकिन गुर्जर और जाट भी साथ खड़े नजर आए हैं. खासकर मिडिल क्लास के मतदाताओं ने बड़ी संख्या में बीजेपी को वोट दिया है, उनकी अपेक्षा भी वैसे ही बीजेपी से भी है.
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