अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण पर मुहर लगा दी। राजनीतिक सहमति के बाद भारत उसे जल्द से जल्द यहां लाने की तैयारी में जुट गया है। प्रत्यर्पण की तारीख और समय तय करने के लिए विदेश मंत्रालय अमेरिकी समकक्ष के संपर्क में है। सहमति बनते ही एनआईए की टीम अमेरिका रवाना हो जाएगी। उम्मीद है कि अगले महीने तक राणा भारत में होगा।
दो वर्ष पूर्व अमेरिकी अदालत ने राणा को भारत प्रत्यर्पित करने की अनुमति दे दी थी। इसके बाद, बीते महीने अमेरिकी अदालत ने प्रत्यर्पण के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका को भी खारिज कर दिया था। अब ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से राणा को प्रत्यर्पित करने की घोषणा की है। अब राजनीतिक सहमति के बाद प्रत्यर्पण की सारी रुकावटें दूर हो गई हैं।
एनआईए करेगी पूछताछ
राणा को भारत ला कर एनआईए की अदालत में पेश किया जाएगा। एनआईए पूछताछ केलिए अदालत से उसकी हिरासत मांगेगी। इसके साथ ही भारत में राणा के खिलाफमुंबई आतंकी हमला मामले में न्यायिक प्रक्रिया की शुरुआत होगी।
दूसरे मामले में गिरफ्तारी के बाद खुला भेद
राणा और मुंबई हमले के दूसरे मास्टर माइंड डेविड कोलमैन हेडली को अमेरिकीजांच एजेंसी एफबीआई ने अक्तूबर 2009 में शिकागो एयरपोर्ट पर पकड़ा था।एफबीआई को सूचना मिली थी कि दोनों पैगंबर मोहम्मद का विवादास्पद कार्टूनछापने वाले डेनमार्क के समाचार पत्र जिलैंड्स-पोस्टेन के कार्यालय पर हमलेकी साजिश रच रहे थे। इसी मामले में पूछताछ में दोनों ने मुंबई आतंकी हमलामामले में अपनी संलिप्ता स्वीकारी।
पाकिस्तान मूल के लश्कर के आतंकी
राणा और हेडली दोनों पाकिस्तानी मूल के आतंकी संगठन लश्कर ए तयबा से जुड़े थे और आपस में गहरे दोस्त थे। राणा ने पाकिस्तानी सेना के मेडिकल कोर में काम करने के बाद 2001 में कनाडा की नागरिकता ले ली।
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