ओडिशा के बालासोर जिले में शुक्रवार (2 जून) को हुई रेल दुर्घटना में अब तक 288 लोगों की मौत हो चुकी है। इस टक्कर में बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस, शालीमार-चेन्नई सेंट्रल कोरोमंडल एक्सप्रेस और एक मालगाड़ी शामिल हैं। शनिवार (3 जून) को रेलवे बोर्ड के एक सदस्य ने बताया कि कोरोमंडल एक्सप्रेस में 1257 रिजर्व यात्री सवार थे और बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस में 1039 रिजर्व यात्री थे।
कैसे हुआ ओडिशा रेल हादसा ?
रेलवे ने बताया की कोरोमंडल एक्सप्रेस अपलाइन पर पूरी गति से चल रही थी और उसे स्टेशन पर नहीं रुकना था। जबकि डाउनलाइन पर बेंगलुरु-हावड़ा यशवंतपुर एक्सप्रेस आ रही थी और हावड़ा की तरफ प्रस्थान कर रही थी। वहीं दूसरी ओर मालगाड़ी कॉमन लूप में खड़ी थी। कोरोमंडल एक्सप्रेस को हरी झंडी मिल गई थी। इसके बाद कोरोमंडल एक्सप्रेस पटरी से उतर गई। उसके कुछ डिब्बे मालगाड़ी से टकरा गए और कुछ डिब्बे यशवंतपुर एक्सप्रेस से टकरा गए। जिससे यह दुर्घटना हुई।रेलवे ने बताई हादसे की वास्तविक वजह
रेलवे बोर्ड के मेंबर ने आगे बताया कि हादसे की वजह कोरोमंडल का पटरी से उतरना है जिसकी वजह से बाकी दोनों ट्रेन चपेट में आईं। अब तक 288 मौतें हुईं हैं। अभी तक जो रेलवे को जानकारी दी गई है उसके अनुसार करीब 900 से ज्यादा लोग घायल हैं। भद्रक से रिलीफ मेडिकल वैन साइट पर 8:30 बजे आ चुकी थी। एनडीआरएफ की टीम को भी 8:30 बजे सूचित किया गया और वह उसी वक्त पहुंच गई।ट्रेन के बेपटरी होने के कारण कि की जाएगी जांच
उन्होंने कहा कि रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म हो गया है। इसका मतलब जितने लोग थे सभी को निकाला जा चुका है। रेलवे सीधे तौर पर मानवीय गलती या मेकेनिकल खामी को मान नहीं रहा है। हालांकि, ट्रेन के पटरी से उतरने के क्या कारण रहे इसकी जांच की जाएगी। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने राज्य में हुए भीषण ट्रेन हादसे के मद्देनजर शनिवार को एक दिवसीय राजकीय शोक घोषित किया है। पीएम मोदी शनिवार को बालासोर में ट्रेन दुर्घटना स्थल और कटक के उस अस्पताल का दौरा करेंगे, जहां घायलों का इलाज किया जा रहा है।Read More: बालासोर पहुंचे पीएम मोदी, ट्रेन हादसे वाली जगह का कर रहे हैं निरीक्षण
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