नई दिल्ली. भारतीय सेना की युद्ध क्षमता को और सशक्त बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने 83 कैरियर एयर डिफेंस ट्रैक्ड सिस्टम की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है। ये अत्याधुनिक वाहन फ्रंटलाइन पर तैनात टैंक और बख्तरबंद यूनिट्स को हवाई हमलों से सुरक्षा प्रदान करेंगे। इस कदम को बदलते युद्ध परिदृश्य में सेना की तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
‘आकाशतीर’ सिस्टम से बढ़ेगी युद्ध दक्षता
इन ट्रैक्ड कैरियर पर आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किया जाएगा, जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने विकसित किया है। यह एक उन्नत कमांड और कंट्रोल सिस्टम है, जो विभिन्न रडार, सेंसर और हथियार प्रणालियों को एकीकृत कर रियल-टाइम में काम करता है। इससे युद्ध के दौरान खतरे की तुरंत पहचान और प्रभावी जवाब देना संभव हो सकेगा।
ट्रैक्ड कैरियर क्यों हैं जरूरी
सेना के टैंक और आर्मर्ड कॉलम अक्सर कठिन भौगोलिक परिस्थितियों जैसे रेगिस्तान, पहाड़ी इलाकों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संचालित होते हैं। ऐसे में पारंपरिक पहिएदार वाहन उनकी गति और मार्ग के अनुरूप नहीं चल पाते। ट्रैक्ड कैरियर इन परिस्थितियों में टैंकों के साथ सहजता से आगे बढ़ सकते हैं, जिससे फ्रंटलाइन पर भी एयर डिफेंस सिस्टम लगातार सक्रिय रह सकेगा।
मोबाइल एयर डिफेंस कमांड पोस्ट की भूमिका
ये कैरियर सिस्टम मोबाइल एयर डिफेंस कमांड पोस्ट के रूप में कार्य करेंगे। इनका प्रमुख काम हवाई खतरों जैसे ड्रोन, लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर की पहचान करना और तत्काल प्रतिक्रिया के लिए संबंधित यूनिट्स को निर्देश देना होगा। इस प्रणाली के माध्यम से युद्ध के दौरान समन्वय और प्रतिक्रिया समय में उल्लेखनीय सुधार आएगा।
भविष्य की चुनौतियों से निपटने की तैयारी
आधुनिक युद्ध में ड्रोन और ड्रोन स्वार्म जैसे नए खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं। इन कैरियर सिस्टम में भविष्य में ऐसी तकनीकें भी जोड़ी जाएंगी, जो ड्रोन के झुंड से निपटने में सक्षम होंगी। यह पहल भारतीय सेना को तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सामरिक बढ़त और सुरक्षा कवच का विस्तार
इस परियोजना के लागू होने के बाद भारतीय सेना को फ्रंटलाइन पर एक मजबूत और गतिशील हवाई सुरक्षा कवच मिलेगा। इससे न केवल टैंक कॉलम की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि युद्ध के दौरान रणनीतिक बढ़त हासिल करने में भी मदद मिलेगी। यह पहल भारत की रक्षा तैयारियों को नए स्तर पर ले जाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।