नए महीने की शुरुआत के साथ ही ऑटो एलपीजी के दामों में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त दबाव पड़ गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब घरेलू ईंधन बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है।
पश्चिम एशिया संकट का वैश्विक असर
पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने से पहले एलपीजी की कीमत लगभग ₹52 प्रति लीटर थी। लेकिन पिछले साल फरवरी में शुरू हुए इस संघर्ष के बाद वैश्विक ईंधन आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिसका असर कई देशों के साथ-साथ भारत में भी देखने को मिल रहा है। देश में ऑटो एलपीजी और रसोई गैस की आपूर्ति और कीमतों दोनों पर दबाव बढ़ा है।
लगातार बढ़ते दामों का सिलसिला
संघर्ष शुरू होने के बाद 11 मार्च को पहली बार ऑटो एलपीजी की कीमतों में ₹5 की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जिसके बाद दर ₹57.68 से बढ़कर ₹62.68 प्रति लीटर हो गई। इसके बाद 31 मार्च को फिर से ₹7.32 की बढ़ोतरी हुई और कीमत ₹70 प्रति लीटर तक पहुंच गई। इसके बाद 1 अप्रैल को एक ही झटके में ₹12.28 की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे कीमत में तेज उछाल आया।
अब फिर बढ़ा दाम, पहुंचा ₹89.40 प्रति लीटर
अब महज एक महीने के भीतर ही ऑटो एलपीजी की कीमतों में फिर से ₹6.44 की बढ़ोतरी हो गई है। इस ताजा वृद्धि के बाद देश में ऑटो एलपीजी की कीमत बढ़कर ₹89.40 प्रति लीटर हो गई है, जिससे परिवहन क्षेत्र और आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ औरबढ़ गया है।