कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण (29 अप्रैल) के लिए सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर ले जाया गया है। चुनाव आयोग को आशंका है कि जिन जिलों में मतदान संपन्न हो चुका है, वहां से असामाजिक तत्व जलमार्गों का सहारा लेकर उन क्षेत्रों में घुस सकते हैं जहाँ बुधवार को वोटिंग होनी है। इसी खतरे को देखते हुए सुंदरबन से लेकर खड़दह और हल्लीशहर तक पूरे नदी तटीय क्षेत्र में 'स्पेशल ड्राइव' शुरू की गई है।
नदी के रास्ते घुसपैठ पर लगाम
आयोग और पुलिस प्रशासन अब केवल सड़कों पर नाका चेकिंग तक सीमित नहीं है। हुगली नदी और सुंदरबन के खाड़ियों के जरिए बाहरी लोगों के प्रवेश को रोकने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:
स्पीडबोट से पेट्रोलिंग: पुलिसकर्मी और केंद्रीय बल दिन-रात स्पीडबोट के जरिए नदी की लहरों पर गश्त लगा रहे हैं।
कोस्ट गार्ड की एंट्री: सुंदरबन जैसे दुर्गम इलाकों में कोस्ट गार्ड की मदद ली जा रही है, जो हर संदिग्ध नाव की तलाशी ले रहे हैं।
रिवर ट्रैफिक पुलिस: डायमंड हार्बर से लेकर कोलकाता पुलिस के अधिकार क्षेत्र तक रिवर ट्रैफिक पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
संदिग्ध नावें और नकदी जब्त
तलाशी अभियान के दौरान प्रशासन को बड़ी सफलताएं भी मिल रही हैं:
जब्त हुईं नावें: सूत्रों के अनुसार, दूसरे जिलों से आ रही कई संदिग्ध नावों को रोका गया है। पूछताछ में संतोषजनक जवाब न मिलने पर कई नावों को वापस भेज दिया गया।
कैश की बरामदगी: जलमार्गों पर चेकिंग के दौरान न केवल लोग, बल्कि भारी मात्रा में संदिग्ध नकदी भी बरामद की गई है, जिसका इस्तेमाल चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता था।
आयोग की सख्त रणनीति के मुख्य बिंदु:
1. आउटसाइडर बैन: मतदान वाले निर्वाचन क्षेत्रों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश को रोकने के लिए सीमावर्ती जलमार्गों को सील कर दिया गया है।
2. सघन तलाशी: हर छोटी-बड़ी नाव और फेरी सेवा पर नजर रखी जा रही है ताकि हथियारों या अवैध सामग्री की तस्करी न हो सके।
3. कोऑर्डिनेशन: राज्य पुलिस, केंद्रीय बल और कोस्ट गार्ड के बीच रीयल-टाइम समन्वय के लिए न्यूटाउन कंट्रोल रूम का उपयोग किया जा रहा है।
उत्तर और दक्षिण 24 परगना के साथ-साथ कोलकाता के संवेदनशील बूथों पर शांति बनाए रखने के लिए यह 'वॉटर-टाइट' सुरक्षा चक्र तैयार किया गया है।