जम्मू-कश्मीर - भारतीय जनता पार्टी के सीनियर नेता रविंदर रैना ने भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत को लेकर चल रही चर्चाओं पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर कुछ लोगों द्वारा पत्र लिखे जाने की खबरें सामने आई हैं, लेकिन भारत सरकार को इस तरह के पत्रों की कोई आवश्यकता नहीं है।
भारत हमेशा दोस्ताना रिश्ते चाहता है
रविंदर रैना ने कहा कि भारत ने हमेशा अपने पड़ोसी देशों के साथ अच्छे और दोस्ताना संबंध बनाए रखने की कोशिश की है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के लाहौर दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी भारत ने शांति और संवाद का संदेश दिया था।
कारगिल और आतंकी घटनाओं का जिक्र
उन्होंने कहा कि लाहौर बस यात्रा के बाद कारगिल में घुसपैठ हुई और इसके बाद संसद पर भी हमला किया गया। रैना ने यह भी कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री शपथ समारोह में पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री की मौजूदगी के बावजूद आतंकवाद से जुड़े घटनाक्रम जारी रहे।
बातचीत से परहेज नहीं, लेकिन शर्तें साफ हों
भाजपा नेता ने कहा कि भारत बातचीत से कभी पीछे नहीं हटता, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि अगर कोई देश भारत को आंख दिखाता है तो उसके साथ सामान्य बातचीत की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के कई देशों के साथ अच्छे संबंध रखता है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
टेरर और टॉक एक साथ नहीं चल सकते
रैना ने दो टूक कहा कि “टेरर और टॉक” यानी आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने बातचीत की अपील करते हुए पत्र लिखा है, वे भी इस सच्चाई को जानते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि पाकिस्तान जैसे देश के साथ बातचीत में यह गारंटी कौन देगा कि वह किसी प्रकार की हरकत नहीं करेगा।
सख्त संदेश के साथ बयान खत्म
अपने बयान के अंत में रैना ने जोर देकर कहा कि भारत की सुरक्षा और संप्रभुता सर्वोपरि है और इसी आधार पर विदेश नीति तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के माहौल में बातचीत संभव नहीं है और पहले शांति और भरोसे का वातावरण बनना जरूरी है।