नई दिल्ली। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने नए नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) नियम 2024 पर रोक लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 के विवादित प्रावधानों के निरंतर संचालन पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि अधिनियम और नियमों के परिणामस्वरूप केवल कुछ धर्मों से संबंधित व्यक्तियों को नागरिकता प्रदान की जाएगी, जिसके परिणामस्वरूप वर्तमान रिट याचिका के लंबित रहने के दौरान "असफल स्थिति" उत्पन्न होगी।
गृह मंत्रालय ने सोमवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) नियम 2024 की अधिसूचना जारी की है। इसका उद्देश्य पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के छह गैर-मुस्लिम समुदायों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) को धर्म के आधार पर नागरिकता प्रदान करना है, जिन्होंने 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश किया था।
अधिनियम को दिसंबर 2019 में पारित किया गया था। इसे अब पूरे भारत में लागू है। गृह मंत्री अमित शाह ने कुछ समय पहले ही सन्देश दिए थे कि, लोकसभा चुनाव के पहले CAA लागू कर दिया गया जाएगा। सोमवार से यह पूरे भारत में लागू हो गया है इसे लेकर अलग - अलग लोगों की अलग - अलग प्रतिक्रया आई है। इधर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग द्वारा लगाई गई याचिका का समर्थन किया है।
शशि थरूर ने कहा कि, 'मैं इसे (CAA नियम 2024) नैतिक और संवैधानिक रूप से गलत मानता हूं, मैं इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने के इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के फैसले का पूरी तरह से समर्थन करता हूं और यदि भारत गठबंधन और कांग्रेस पार्टी सत्ता में आती है, तो हम बिना किसी संदेह के कानून के इस प्रावधान को वापस ले लेंगे। यह हमारे घोषणापत्र में होगा।
याचिका में नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 के विवादित प्रावधानों के निरंतर संचालन पर रोक लगाने की मांग की गई है।
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