IND24 Digital Bangla | विशेष समाचार
नई दिल्ली: देश में आगामी जनगणना को लेकर केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण घोषणा की है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय ने 30 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक अधिसूचना जारी कर जनगणना का कार्यक्रम निर्धारित कर दिया है। इसके मुताबिक, 25 जनवरी 2027 से जनगणना की प्रक्रिया शुरू होगी और 28 फरवरी 2027 तक चलेगी। इस बार आम लोगों को घर-घर सर्वेक्षण शुरू होने से पहले खुद अपनी जानकारी दर्ज कराने यानी स्व-गणना (Self Enumeration) का अवसर भी दिया जाएगा।
10 जनवरी से शुरू होगी स्व-गणना की प्रक्रिया
केंद्र सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, जनगणना की मुख्य प्रक्रिया शुरू होने से पहले 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027 तक स्व-गणना का चरण आयोजित किया जाएगा। इस दौरान आम नागरिक निर्धारित माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद 25 जनवरी से घर-घर जाकर जनगणना का काम शुरू होगा।
आंकड़ों में सुधार के लिए मिलेगा अतिरिक्त समय
जनगणना की मुख्य प्रक्रिया पूरी होने के बाद केंद्र सरकार ने आंकड़ों की समीक्षा और आवश्यक संशोधन के लिए भी समय निर्धारित किया है। इसके तहत 1 मार्च से 5 मार्च 2027 तक रिवीजन राउंड चलेगा। इस दौरान दर्ज की गई जानकारियों की जांच और उनमें जरूरी सुधार किए जाएंगे।
1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि होगी संदर्भ तिथि
अधिसूचना में 1 मार्च 2027 की रात 12 बजे (00:00 बजे) को जनगणना की संदर्भ तिथि (Reference Date) निर्धारित किया गया है। जनगणना से संबंधित आंकड़ों के निर्धारण में इसी तारीख और समय को आधार बनाया जाएगा।
कई राज्यों और क्षेत्रों को मिली समय-सारणी से छूट
केंद्र सरकार की अधिसूचना में कुछ राज्यों और दुर्गम क्षेत्रों के लिए निर्धारित कार्यक्रम से छूट का भी उल्लेख किया गया है। मणिपुर को फिलहाल इस समय-सारणी से बाहर रखा गया है। वहां जनगणना की तारीखों को लेकर बाद में अलग से निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
इसके अलावा गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख में भी यह कार्यक्रम लागू नहीं होगा। वहीं, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके दुर्गम क्षेत्रों को भी इस समय-सारणी से अलग रखा गया है।
जनगणना की तैयारियों को मिलेगी रफ्तार
केंद्र सरकार की ओर से तारीखों और अलग-अलग चरणों की समयसीमा निर्धारित किए जाने के बाद अब जनगणना को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज होने की उम्मीद है। स्व-गणना की सुविधा से आम लोगों को अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कराने का अवसर मिलेगा, जबकि संशोधन के लिए अलग समय निर्धारित होने से आंकड़ों की समीक्षा की प्रक्रिया भी पूरी की जा सकेगी।