23 मार्च यानी आज मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप, मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। ‘स्कंद’ का अर्थ कार्तिकेय है, और उन्हें कार्तिकेय की माता होने के कारण स्कंदमाता कहा जाता है। मां स्कंदमाता चार भुजाओं वाली हैं और कमल के पुष्प पर विराजमान रहती हैं, इसलिए इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। उनकी गोद में बाल रूप में कार्तिकेय विराजमान रहते हैं। मान्यता है कि उनकी पूजा करने से स्वयं कार्तिकेय की पूजा का फल भी प्राप्त होता है।
स्कंदमाता की उपासना से संतान प्राप्ति के योग मजबूत होते हैं। यदि संतान से जुड़ी कोई समस्या या कष्ट हो, तो वह भी दूर होने लगता है। इसके अलावा, परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।
पूजन विधि
जब भी स्कंदमाता की पूजा करें, उन्हें पीले फूल अर्पित करें और पीले रंग के पदार्थों का भोग लगाएं। यदि संभव हो तो पीले वस्त्र धारण करके पूजा करें। पूजा के अंत में संतान से जुड़ी अपनी प्रार्थना अवश्य करें, जिससे मनोकामना पूरी होने की मान्यता है।
करें इस मंत्र का जाप
'ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे' इस दिन के बाद नियमित रूप से अपने कंठ पर तिलक लगाना शुरू करें. ऐसा करने से धीरे-धीरे विशुद्ध चक्र मजबूत होने लगता है और वाणी तथा आत्मविश्वास में सुधार आता है.
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