पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ तीसरा विकल्प बनाने की कोशिश कर रहे हुमायूं कबीर को आखिरकार एक अहम सहयोगी मिल गया है। असदुद्दीन ओवैसी ने उनकी पार्टी के साथ गठबंधन करने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि दोनों दलों के बीच समझौता लगभग तय हो चुका है और जल्द ही कोलकाता में इसकी औपचारिक घोषणा हो सकती है।
हैदराबाद में गठबंधन का ऐलान
हैदराबाद में आयोजित एक सभा में असदुद्दीन ओवैसी ने ऐलान किया कि AIMIM, हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ मिलकर बंगाल चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि यह गठबंधन गरीबों और वंचित वर्गों की आवाज को मजबूती देगा और राज्य में अन्याय के खिलाफ साझा लड़ाई लड़ेगा। ओवैसी की पार्टी ने मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों में धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत की है। बिहार में मिली सफलता के बाद अब उनका फोकस बंगाल पर है।
लंबे समय से चल रही थी सहयोगी की तलाश
हुमायूं कबीर पिछले दो महीनों से विभिन्न विपक्षी दलों को साथ लाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने सीपीएम और आईएसएफ जैसे दलों से भी संपर्क साधा और सीपीएम नेता मोहम्मद सलीम से मुलाकात की, लेकिन कोई ठोस गठबंधन नहीं बन पाया। अब AIMIM के साथ हाथ मिलाकर उनकी तीसरे मोर्चे की रणनीति को नई दिशा मिलती दिख रही है।
सीट बंटवारे पर नजर
गठबंधन की घोषणा के बाद अब सबसे बड़ा सवाल सीट शेयरिंग को लेकर है। हुमायूं कबीर पहले ही 182 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कह चुके हैं और करीब 150 उम्मीदवारों के नाम भी घोषित कर चुके हैं। वहीं, AIMIM इस गठबंधन में कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, इस पर बातचीत जारी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बंगाल विधानसभा चुनाव में यह नया गठबंधन कितना असर डाल पाता है।
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