पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध का प्रभाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इसका असर भारत में भी कमर्शियल एलपीजी की उपलब्धता पर पड़ा है, जिसके कारण कई शहरों में होटल, ढाबे और रेस्तरां संचालकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति को व्यवस्थित करने के लिए 20 प्रतिशत कोटा निर्धारित करने का निर्णय लिया है, जिससे व्यावसायिक उपभोक्ताओं को न्यूनतम आवश्यक गैस उपलब्ध कराई जा सके।
होटल और पर्यटन उद्योग पर पड़ा था गहरा असर
कमर्शियल गैस की कमी का सबसे अधिक प्रभाव होटल, रेस्तरां और पर्यटन उद्योग पर पड़ा है। कई प्रतिष्ठानों को अपने संचालन में कटौती करनी पड़ी, जबकि कुछ छोटे होटल और ढाबे अस्थायी रूप से बंद होने की कगार पर पहुंच गए थे। गैस की अनुपलब्धता के कारण कई स्थानों पर भोजन तैयार करने में कठिनाई उत्पन्न हो रही थी, जिसके चलते संचालकों ने अपने मेन्यू तक में बदलाव करना शुरू कर दिया था। सरकार के नए निर्णय से इस संकटग्रस्त उद्योग को आंशिक राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
पेट्रोलियम मंत्रालय की उच्चस्तरीय बैठक में हुआ निर्णय
इस विषय पर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में कमर्शियल एलपीजी की वर्तमान स्थिति, आपूर्ति श्रृंखला पर पड़े प्रभाव तथा होटल और पर्यटन क्षेत्र की समस्याओं पर विचार किया गया। अधिकारियों के अनुसार इस समीक्षा के बाद यह तय किया गया कि पंजीकृत कमर्शियल उपभोक्ताओं को उनकी कुल मांग का लगभग 20 प्रतिशत गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि व्यवसायिक गतिविधियां पूरी तरह ठप न हों।
आपूर्ति वितरण का निर्णय राज्यों के साथ मिलकर
सूत्रों के अनुसार कमर्शियल गैस सिलेंडरों की 20 प्रतिशत आपूर्ति किस क्षेत्र को प्राथमिकता के आधार पर दी जाएगी, इसका निर्णय सार्वजनिक क्षेत्र की तीनों तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशक और संबंधित राज्य सरकारों के अधिकारी मिलकर करेंगे। यह व्यवस्था केवल पंजीकृत कमर्शियल कनेक्शन धारकों पर लागू होगी, जिससे वास्तविक जरूरतमंद व्यवसायों को प्राथमिकता मिल सके।
रेस्तरां संघ की अपील के बाद बढ़ी सक्रियता
कमर्शियल गैस संकट को लेकर राष्ट्रीय रेस्तरां संघ ने भी पेट्रोलियम मंत्री को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया था। संघ ने सरकार से अनुरोध किया था कि रेस्तरां और होटल संचालकों को प्रतिदिन एक या दो सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि उनके संचालन में बाधा न आए। साथ ही यह भी सुझाव दिया गया था कि कमर्शियल गैस सिलेंडरों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत लाया जाए, जिससे उनकी नियमित उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
ऊर्जा संकट के बीच संतुलन बनाने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संकट के दौर में सरकार का यह निर्णय आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल होटल और रेस्तरां उद्योग को राहत मिलेगी, बल्कि पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय रोजगार पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा। आने वाले समय में ऊर्जा आपूर्ति की वैश्विक स्थिति के अनुसार सरकार आगे और कदम उठा सकती है।
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