दिल्ली की एक अदालत ने कथित आबकारी घोटाले से संबंधित भ्रष्टाचार के एक मामले में जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी। सिसोदिया की हिरासत अवधि आज समाप्त हो रही थी, जिसके कारण उन्हें विशेष न्यायाधीश एम. के. नागपाल के समक्ष पेश किया गया था। अदालत ने सिसोदिया की हिरासत अवधि 22 मार्च तक बढ़ा दी। जज ने यह आदेश तब दिया जब सीबीआई के वकील ने दावा किया कि जांच महत्वपूर्ण चरण में है और अगर आम आदमी पार्टी के नेता सिसोदिया को जमानत पर रिहा किया गया तो वह जांच में बाधा डाल सकते हैं या न्याय की जद से भाग सकते हैं।
जज ने मामले के कुछ आरोपियों द्वारा आरोप तय करने को लेकर शुरू की गई बहस पर आपत्ति जताने वाली एक अर्जी पर भी दलीलें सुनीं। बचाव पक्ष के वकील नीतेश राणा ने शीर्ष अदालत के फैसलों का हवाला देते हुए दलील दी कि एक बार मुकदमा शुरू हो जाने के बाद आगे की जांच नहीं की जा सकती और आरोप तय होने के बाद ही मुकदमा शुरू होता है। राणा ने न्यायाधीश से कहा, ‘‘इसलिए, जांच पूरी होने तक आरोप पर बहस नहीं हो सकती।'' आरोपियों ने सीबीआई की इस दलील के बाद अर्जी दी थी कि वह मामले में पूरक आरोप-पत्र दाखिल कर सकती है। जज ने आवेदन पर आदेश सुरक्षित रख लिया। आदेश 22 मार्च को सुनाने की संभावना है।
सीबीआई और ईडी ने आरोप लगाया है कि दिल्ली आबकारी नीति 2020-21 को संशोधित करते समय अनियमितताएं की गईं, लाइसेंसधारकों को अनुचित लाभ दिया गया, लाइसेंस शुल्क माफ किया गया या कम किया गया तथा सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बिना लाइसेंस अवधि बढ़ाई गई। लाभार्थियों ने कथित तौर पर ‘अवैध' लाभ को आरोपी अधिकारियों तक भी पहुंचाया और जांच से बचने के लिए अपनी लेखा पुस्तिका में गलत प्रविष्टियां कीं।
दिल्ली की एक अदालत ने कथित आबकारी घोटाले से संबंधित भ्रष्टाचार के एक मामले में जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी।
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