मध्य प्रदेश की राजनीति में दिग्गज नेताओं की सक्रियता को लेकर हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने साफ संकेत दिया है कि वे सक्रिय राजनीति में बने रहेंगे। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उद्धृत करते हुए कहा-“मैं न टायर्ड हूं, न रिटायर्ड।” दिग्विजय सिंह के इस बयान के बीच अब भाजपा की फायरब्रांड नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भी बड़ा सियासी संदेश दे दिया है। टीकमगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में उमा भारती ने कहा कि “जब तक मैं जिंदा हूं, तब तक राजनीति करती रहूंगी और समाजसेवा में लगी रहूंगी।”
दोनों ओर से सक्रियता के संकेत
एक तरफ दिग्विजय सिंह का “न टायर्ड, न रिटायर्ड” वाला संदेश है, तो दूसरी ओर उमा भारती का “जीवनभर राजनीति” का संकल्प - दोनों बयान यह साफ कर रहे हैं कि मध्य प्रदेश की राजनीति में अनुभवी नेताओं की भूमिका अभी खत्म होने वाली नहीं है।
सियासी मायने क्या हैं?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इन दोनों दिग्गज नेताओं के बयान ऐसे समय आए हैं जब प्रदेश में चुनावी और संगठनात्मक गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। ऐसे में दिग्विजय सिंह का सक्रिय रहने का ऐलान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए संदेश माना जा रहा है,वहीं उमा भारती का बयान भाजपा में भी उनकी संभावित सक्रिय भूमिका की ओर इशारा कर रहा है
जनता और कार्यकर्ताओं को संदेश
जहां दिग्विजय सिंह ने अपने अनुभव और निरंतरता पर जोर दिया, वहीं उमा भारती ने जनता से आशीर्वाद और समर्थन की अपील करते हुए साफ कहा कि वे अंतिम समय तक समाज और राजनीति में सक्रिय रहना चाहती हैं।
नतीजा: सियासत में ‘सीनियर पावर’ बरकरार
दोनों नेताओं के ताजा बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मध्य प्रदेश की राजनीति में सीनियर लीडरशिप अभी भी पूरी तरह सक्रिय है और आने वाले समय में उनकी भूमिका अहम बनी रहेगी।
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