पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि देश में केवल कमर्शियल एलपीजी की कीमतें बढ़ाई गई हैं, जबकि घरेलू एलपीजी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। मंत्रालय ने एक्स पर जारी बयान में बताया कि होटल और उद्योगों द्वारा इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतें अनियंत्रित होती हैं और बाजार द्वारा तय की जाती हैं। ये आमतौर पर हर महीने संशोधित की जाती हैं। देश में कुल एलपीजी खपत में कमर्शियल सिलेंडरों की हिस्सेदारी केवल 10% से भी कम है।
घरेलू उपभोक्ताओं को पूरी सुरक्षा
बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रतिबद्धता के अनुरूप, घरेलू उपभोक्ताओं को पूरा सुरक्षा कवच मिलेगा। 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत 913 रुपए पर स्थिर बनी हुई है। पीएमयूवाई योजना के तहत गरीबों के लिए एलपीजी सिलेंडरों की सब्सिडी वाली कीमत भी 613 रुपए पर ही बनी हुई है।
तेल कंपनियों को हो रहा भारी नुकसान
घरेलू कीमतों को स्थिर रखने के कारण पब्लिक सेक्टर की तेल मार्केटिंग कंपनियों को हर सिलेंडर पर 380 रुपए का नुकसान हो रहा है। मंत्रालय के अनुसार, मई के अंत तक कुल नुकसान लगभग 40,484 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा। पिछले साल भी 60,000 करोड़ रुपए के नुकसान में से आधा तेल पीएसयू और आधा सरकार ने उठाया था, ताकि भारतीय नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय एलपीजी की ऊंची कीमतों से बचाया जा सके।
घरेलू एलपीजी की कीमत दुनिया में सबसे कम
मंत्रालय ने कहा कि भारत में घरेलू एलपीजी की कीमत दुनिया में सबसे कम है। तुलना के लिए:
- पाकिस्तान: 1,046 रुपए प्रति सिलेंडर
- श्रीलंका: 1,242 रुपए प्रति सिलेंडर
- नेपाल: 1,208 रुपए प्रति सिलेंडर
पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी स्थिर
बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि रेगुलर पेट्रोल और डीजल की कीमतें पहले जैसी ही हैं:
- पेट्रोल: 94.77 रुपए प्रति लीटर
- डीजल: 87.67 रुपए प्रति लीटर