दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ यानी DUSU के चुनाव परिणाम साफ हो चुके हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी ABVP ने इस बार तीन महत्वपूर्ण पद अपने नाम किए हैं। यश डबास अध्यक्ष चुने गए हैं जबकि रिया छाबड़ी को सचिव और लक्ष्यराज सिंह को संयुक्त सचिव का पद मिला है। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज की है। इन चार पदाधिकारियों के पास अब अगले कार्यकाल में छात्र हितों की नुमाइंदगी की जिम्मेदारी होगी। चुनाव के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि ये पदाधिकारी अपने अधिकारों और उपलब्ध
सुविधाओं का इस्तेमाल कैसे करते हैं।
वेतन और भत्ते की वास्तविक स्थिति
DUSU के पदाधिकारियों को कोई निश्चित वेतन या सरकारी भत्ता नहीं दिया जाता। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि छात्र राजनीति को पूर्णतः सेवा भाव पर आधारित रखा जा सके। पदाधिकारी अपनी पढ़ाई के साथ-साथ संघ के कामकाज को संभालते हैं और इसके बदले कोई मासिक आय नहीं मिलती। कई छात्र नेता इसे स्वैच्छिक सेवा का हिस्सा मानते हैं। हालांकि प्रभाव और पहुंच के मामले में ये पद काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं क्योंकि विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच सीधा सेतु का काम करते हैं। वेतन न मिलने के बावजूद इन पदों की राजनीतिक अहमियत हमेशा बनी रहती है।
कार्यालय और स्टाफ की सुविधा
नॉर्थ कैंपस में DUSU यूनियन को अपना अलग कार्यालय उपलब्ध कराया जाता है। यहां पदाधिकारी बैठकर अपने दैनिक कामकाज का संचालन करते हैं। कार्यालय के संचालन और प्रशासनिक कार्यों में मदद के लिए क्लर्क या सपोर्ट स्टाफ की सुविधा भी दी जाती है। यह स्टाफ पदाधिकारियों को फाइलिंग, पत्राचार और छात्र शिकायतों के निपटारे में सहायता प्रदान करता है। कार्यालय होने से छात्रों के लिए पदाधिकारियों तक पहुंचना आसान हो जाता है और संघ की गतिविधियां व्यवस्थित ढंग से चलती हैं। यह सुविधा पदाधिकारियों को विश्वविद्यालय परिसर के अंदर एक औपचारिक पहचान भी देती है।
बजट और फंड का प्रावधान
दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से DUSU यूनियन को निर्धारित बजट और फंड आवंटित किया जाता है। इस राशि का इस्तेमाल छात्र कल्याण संबंधी कार्यों, सेमिनार, कार्यशालाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में किया जा सकता है। पदाधिकारी इस बजट के जरिए विभिन्न गतिविधियों को मंजूरी दिलाकर छात्रों के लिए उपयोगी कार्यक्रम करा सकते हैं। फंड का सही और पारदर्शी इस्तेमाल संघ की विश्वसनीयता को बढ़ाता है। कई बार इसी बजट से छात्र समस्याओं के तात्कालिक समाधान भी निकाले जाते हैं जिससे पदाधिकारियों की भूमिका और प्रभावी हो जाती है।
पदाधिकारियों के पास असली पावर क्या है
DUSU पदाधिकारियों के पास सबसे बड़ी ताकत छात्र मुद्दों को उठाकर प्रशासन तक पहुंचाने की होती है। वे विश्वविद्यालय की विभिन्न समितियों में छात्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं और फीस, परीक्षा, हॉस्टल, सुरक्षा जैसी समस्याओं को लेकर आवाज उठा सकते हैं। पदाधिकारी प्रशासन से सीधे संवाद करते हैं और कई बार महत्वपूर्ण फैसले प्रभावित करने में सफल होते हैं। उनकी सिफारिशों और दबाव से कई छात्र हितैषी फैसले होते देखे गए हैं। हालांकि इनके पास कोई कानूनी या प्रशासनिक अधिकार नहीं होते बल्कि नैतिक और प्रतिनिधिक प्रभाव ही उनकी असली ताकत होता है। छात्रों का समर्थन ही इनकी सबसे बड़ी पूंजी मानी जाती है।