देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवाने के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग ने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट या आदर्श चुनाव आचार संहिता बनाई है। देश के पांच राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान हो चुका है। एलान होते ही आदर्श चुनाव आचार संहिता प्रभावी हो चुकी है।
क्या है आचार संहिता?
आदर्श आचार संहिता कानून के द्वारा लाया गया प्रावधान नहीं है। यह सभी राजनीतिक दलों की सर्वसहमति से लागू व्यवस्था है। जिसका सभी को पालन करना होता है। आदर्श आचार संहिता की शुरुआत सबसे पहले साल 1960 में केरल विधानसभा चुनाव में हुई थी। जिसमें इसके तहत बताया गया कि उम्मीदवार क्या कर सकता है और क्या नहीं। समय-समय पर चुनाव आयोग इसके दिशा-निर्देशों में बदलाव करता रहता है। चुनाव की तारीखें के एलान के साथ ही आचार संहिता लागू हो जाती है, जो चुनाव परिणाम घोषित होने तक लागू रहती है। चुनाव में हिस्सा लेने वाले राजनैतिक दल, उम्मीदवार, सरकार और प्रशासन समेत चुनाव से जुड़े सभी लोगों पर इन नियमों का पालन करने की जिम्मेदारी होती है।इन कामों पर होती है पाबंदी
- आचार संहिता लागू होने के बाद केंद्र या राज्य सरकार कोई नई योजना या कोई नई घोषणाएं नहीं कर सकती। कोई भूमि पूजन और लोकार्पण भी नहीं हो सकता है।
- चुनावी तैयारियों के लिए सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। सरकारी गाड़ी, बंगला, हवाई जहाज आदि का उपयोग वर्जित होगा।
- आचार संहिता लागू होते ही दीवारों पर लिखे गए सभी तरह के पार्टी संबंधी नारे व प्रचार सामग्री हटा दी जाती हैं। होर्डिंग, बैनर व पोस्टर भी हटा दिए जाते हैं।
- राजनीतिक दलो को रैली, जुलूस या फिर मीटिंग के लिए परमिशन लेनी होती है।
- धार्मिक स्थलों और प्रतीकों का इस्तेमाल चुनाव के दौरान नहीं किया जाएगा।
- मतदाताओं को किसी भी तरह से रिश्वत नहीं दी जा सकती है। रिश्वत के बल पर वोट हासिल नहीं किए जा सकते है।
- किसी भी प्रत्याशी या पार्टी पर निजी हमले नहीं किए जा सकते है।
- मतदान केंद्रों पर वोटरों को लाने के लिए गाड़ी मुहैया नहीं करवा सकते है।
- मतदान के दिन और इसके 24 घंटे पहले किसी को शराब वितरित नहीं की जा सकती है।
नियम तोड़े तो होगी कार्यवाही
आचार संहिता लागू होते ही सरकारी कर्मचारी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक निर्वाचन आयोग के कर्मचारी बन जाते है। वह आयोग द्वारा दिए गये दिशा-निर्देश के अनुसार ही कार्य करते हैं। साथ ही चुनाव आयोग द्वारा जारी किये गये निर्देशों का पालन भी सुनिश्चित करते हैं। अगर कोई इन नियमों का पालन नहीं करता है अथवा उल्लघंन करते पाया जाता है। तो चुनाव आयोग उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। उम्मीदवार को चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है या उसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज हो सकती है। दोषी पाए जाने पर उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है।Read More: जानिए किस राज्यों में कितनी सीटें, 2018 में क्या था परिणाम
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