नई दिल्ली. इंटरनेट पर सुरक्षित ब्राउजिंग सुनिश्चित करने वाली कंपनी ईमुद्रा में ही सुरक्षा संबंधी खामियां उजागर हुई हैं। बेंगलुरु स्थित यह कंपनी डिजिटल प्रमाणपत्र जारी करती है जिन पर प्रमुख ब्राउजर और ऑपरेटिंग सिस्टम भरोसा करते हैं। हाल में सामने आई जानकारी के अनुसार कंपनी द्वारा जारी आठ डिजिटल प्रमाणपत्रों की निजी सुरक्षा कुंजियों में गंभीर गड़बड़ी पाई गई है। इन कुंजियों की कमजोरी इतनी अधिक थी कि कोई भी व्यक्ति उन्हें आसानी से तोड़ सकता था। सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस चूक को वैश्विक इंटरनेट की भरोसेमंद कड़ी पर बड़ा प्रहार बताया है। अभी तक इन कुंजियों के गलत इस्तेमाल का कोई प्रमाण नहीं मिला है लेकिन खतरे की आशंका बनी हुई है।
गूगल ऐपल और मोजिला ने सर्टिफिकेट ब्लॉक किए
खामी सामने आने के तुरंत बाद गूगल ऐपल और मोजिला जैसी प्रमुख कंपनियों ने ईमुद्रा द्वारा जारी किए गए प्रमाणपत्रों को अपने ब्राउजर में ब्लॉक कर दिया है। इन ब्राउजरों ने फैसला लिया कि अब ईमुद्रा के प्रमाणपत्रों पर भरोसा नहीं किया जाएगा। इससे प्रभावित वेबसाइटों और सेवाओं को नए प्रमाणपत्र प्राप्त करने की आवश्यकता पड़ सकती है। इंटरनेट सुरक्षा व्यवस्था में ब्राउजरों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है क्योंकि वे उपयोगकर्ताओं को असुरक्षित कनेक्शन से बचाते हैं। इस कदम से साफ है कि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वैश्विक स्तर पर इस घटना ने डिजिटल प्रमाणपत्र जारी करने वाली संस्थाओं की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कमजोर सुरक्षा कुंजियों का चौंकाने वाला खुलासा
रिपोर्ट्स के अनुसार ईमुद्रा ने डिजिटल प्रमाणपत्रों के लिए इतनी कमजोर सीक्रेट की बनाई थीं कि कोई भी व्यक्ति कुछ ही सेकंड में उनका पता लगा सकता था। विशेषज्ञों के मुताबिक हर सुरक्षा कुंजी में 116 अंकों की एक रैंडम संख्या होनी चाहिए थी लेकिन इसका ध्यान नहीं रखा गया। अव्यवस्था की हद तो तब हो गई जब एक कुंजी केवल चार अंकों की ही थी। इन कुंजियों का इस्तेमाल करके कोई भी व्यक्ति दुनिया की किसी भी वेबसाइट के लिए डिजिटल प्रमाणपत्र जारी कर सकता था। फोन और कंप्यूटर भी ऐसे प्रमाणपत्रों को असली मान लेते। सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस लापरवाही पर गहरी चिंता जताई है।
केंद्र सरकार ने विशेष जांच के आदेश दिए
भारत सरकार ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए विशेष दल गठित करने के आदेश दिए हैं। डिजिटल प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में हुई चूक राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। नियंत्रक प्रमाणन प्राधिकरण के अधीन काम करने वाली संस्था में इस तरह की खामी स्वीकार योग्य नहीं मानी जा रही। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि कमजोर कुंजियां कैसे बनीं और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं हुआ। सरकार का रुख स्पष्ट है कि इंटरनेट की विश्वसनीयता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।
ईमुद्रा के कार्य क्षेत्र और जिम्मेदारी
बेंगलुरु में केंद्रित ईमुद्रा मुख्य रूप से दो क्षेत्रों में काम करती है। पहला डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र जारी करना और ई साइन सेवाएं उपलब्ध कराना जिनका नियमन नियंत्रक प्रमाणन प्राधिकरण करता है। दूसरा ऐसे डिजिटल प्रमाणपत्र जारी करना जिन पर प्रमुख इंटरनेट ब्राउजर और ऑपरेटिंग सिस्टम भरोसा करते हैं। इनका इस्तेमाल वेबसाइटों सॉफ्टवेयर और ऑनलाइन संचार को सुरक्षित बनाने के लिए किया जाता है। हाल की सुरक्षा घटना कंपनी के दूसरे कार्य क्षेत्र से जुड़ी है। प्रमाणपत्र जारी करने वाली संस्था की जिम्मेदारी अत्यंत संवेदनशील होती है क्योंकि पूरी डिजिटल अर्थव्यवस्था का भरोसा इन्हीं पर टिका होता है।
कमजोर कुंजियों से उत्पन्न संभावित खतरे
CERT-IN के अनुसार इंटरनेट पर वेबसाइट और उपयोगकर्ताओं के बीच भेजी जाने वाली जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए डिजिटल प्रमाणपत्र और सुरक्षा कुंजियों का इस्तेमाल होता है। ये प्रमाणपत्र वेबसाइट की पहचान की पुष्टि करते हैं। यदि कोई अनधिकृत व्यक्ति ऐसी कुंजी हासिल कर ले तो वह फर्जी प्रमाणपत्र बना सकता है। इससे किसी असली वेबसाइट या भुगतान सेवा की नकल करना संभव हो जाता है। लोग यह समझकर फर्जी साइट पर भुगतान या व्यक्तिगत जानकारी दे सकते हैं कि वे वास्तविक कंपनी की वेबसाइट पर हैं। एक कंपनी की विफलता उन संगठनों को भी खतरे में डाल सकती है जिनका उससे सीधा संबंध नहीं रहा।