जम्मू-कश्मीर की कश्मीर घाटी में सर्दियों के आगमन के साथ ही प्रवासी पक्षियों का वार्षिक प्रवास शुरू हो गया है। गंदेरबल जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध शल्लाबुघ वेटलैंड में इस बार लगभग 2.5 लाख माइग्रेटरी पक्षी पहुंच चुके हैं। इनके आगमन से घाटी की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता में नई जान आ गई है।
दुनिया भर से आए विदेशी मेहमान
ब्लॉक फॉरेस्ट ऑफिसर ऐजाज अहमद के अनुसार शल्लाबुघ वेटलैंड में पहुंचने वाले पक्षियों में मैलार्ड, ग्रे लेग गूज, कूट, पिंटेल, पर्पल स्वैम्प हेन, मूरहेन, पोचार्ड, शॉवेलर, साइबेरियन गीज और साइबेरियन बत्तखों जैसी कई दुर्लभ प्रजातियां शामिल हैं। ये पक्षी यूरोप, मध्य एशिया और साइबेरिया जैसे ठंडे क्षेत्रों से हजारों किलोमीटर की लंबी यात्रा कर कश्मीर पहुंचते हैं।
जम्मू-कश्मीर का सबसे बड़ा वेटलैंड
करीब 34,000 कनाल क्षेत्र में फैला शल्लाबुघ वेटलैंड जम्मू-कश्मीर का सबसे बड़ा वेटलैंड माना जाता है। सर्दियों के मौसम में यह इलाका एक प्राकृतिक अभयारण्य का रूप ले लेता है, जहां पक्षियों को सुरक्षित वातावरण, भरपूर भोजन और अनुकूल जलवायु मिलती है। यही कारण है कि यह स्थान प्रवासी जलपक्षियों के लिए सबसे पसंदीदा ठिकानों में से एक बन गया है।
जैव विविधता का अनमोल केंद्र
शल्लाबुघ वेटलैंड की समृद्ध जैव विविधता इसकी सबसे बड़ी पहचान है। यहां मौजूद जल, वनस्पति और सूक्ष्म जीवों की प्रचुरता पक्षियों के लिए आदर्श पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वेटलैंड का संरक्षण न केवल पक्षियों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र की पर्यावरणीय संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
पारिस्थितिक महत्व का जीवंत प्रमाण
हर वर्ष लाखों प्रवासी पक्षियों का यहां आना शल्लाबुघ वेटलैंड के पारिस्थितिक महत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। यह इलाका न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि पूरे देश के सबसे महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध वेटलैंड्स में शामिल है। इन विदेशी मेहमानों की मौजूदगी शल्लाबुघ को प्रकृति प्रेमियों और पक्षी विशेषज्ञों के लिए एक अद्वितीय आकर्षण बनाती है।
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