नई दिल्ली: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने नियमों के उल्लंघन के आरोप में यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड (USL), इनब्रू बेवरेजेस और मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर द्वारा निर्मित 'ओल्ड मंक', 'रॉयल चैलेंज' और 'एंटीक्विटी ब्लू' समेत कई लोकप्रिय व्हिस्की और रम वेरिएंट्स की बिक्री पर रोक लगा दी है। केंद्रीय नियामक संस्था FSSAI ने जांच में पाया कि इन ब्रांड्स के कुछ विशिष्ट कारखानों में प्राकृतिक रूप से परिपक्व (Ageing) करने के बजाय न्यूट्रल स्पिरिट और आर्टिफिशियल (कृत्रिम) फ्लेवर मिलाकर स्वाद और सुगंध तैयार की जा रही थी।
नियमों के उल्लंघन और भ्रामक लेबलिंग का दावा
FSSAI के बयान के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रम में अलग से रम फ्लेवर या व्हिस्की में अलग से व्हिस्की फ्लेवर मिलाने की कोई स्वीकृत निर्माण प्रक्रिया नहीं है। ऐसा करने से कंपनियां परिपक्वता (Maturation) और गुड़, माल्ट या अंगूर जैसे प्राकृतिक घटकों के इस्तेमाल की अनिवार्य प्रक्रिया को बायपास कर रही थीं। इसके अतिरिक्त, 'ओल्ड मंक XXX रम' के एक वेरिएंट पर '7 साल पुराना ब्लेंडेड' होने का दावा किया गया था, जबकि जांच में इसमें मैच्योर रम की मात्रा 5 प्रतिशत से भी कम पाई गई, जो 'खाद्य सुरक्षा और मानक (अल्कोहलिक पेय) विनियम, 2018' का सीधा उल्लंघन है।
किन-किन ब्रांड्स और प्लांट्स पर पड़ा असर
FSSAI के इस आदेश के तहत मध्य प्रदेश में बने यूनाइटेड स्पिरिट्स के 'एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की' और 'रॉयल चैलेंज व्हिस्की', और पश्चिमी महाराष्ट्र में बने 'मैकडोवेल्स No. 1 रम' की बिक्री रोकी गई है। इसके अलावा, मध्य प्रदेश निर्मित इनब्रू बेवरेजेस की 'बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की' और 'ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम' के साथ-साथ महाराष्ट्र के मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर प्लांट में बनने वाले 'ओल्ड मंक' के तीन लोकप्रिय वेरिएंट्स पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंची यूनाइटेड स्पिरिट्स
इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए डियाजियो की भारतीय सहायक कंपनी यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड (USL) ने शेयर बाजारों को सूचित किया कि उनके उत्पाद के लेबल कानून और उद्योग के लंबे समय से चले आ रहे मानकों के अनुरूप हैं। कंपनी ने कानूनी सलाह के आधार पर 1 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर FSSAI के आदेश को चुनौती दी है। वहीं, यह निलंबन केवल चिन्हित कारखानों में निर्मित विशिष्ट वेरिएंट्स पर लागू रहेगा और जब तक नियमों के तहत सुधार नहीं होता, तब तक इनकी बिक्री और वितरण स्थगित रहेगा।