नई दिल्ली, 5 अगस्त 2026 | देशभर में पेट्रोल और डीजल की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने निगरानी व्यवस्था और सख्त करने की जानकारी दी है। मंत्रालय के अनुसार ऑयल मार्केटिंग कंपनियां यानी OMCs पहले से लागू परीक्षण व्यवस्था के साथ अतिरिक्त जांच कर रही हैं, ताकि ईंधन में पानी, रासायनिक संदूषण या मिलावट का समय रहते पता लगाया जा सके।
मंत्रालय ने मंगलवार को जारी स्पष्टीकरण में कहा कि किसी भी रिटेल आउटलेट पर संदूषण या मिलावट मिलने की स्थिति में सख्त कार्रवाई होगी। OMCs को निगरानी केवल पेट्रोल पंप तक सीमित न रखकर ईंधन की पूरी आपूर्ति श्रृंखला में संभावित समस्या का पता लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
87 हजार से अधिक आउटलेट पर दिन में 8–12 बार जांच
मंत्रालय के मुताबिक देशभर के 87,000 से अधिक ईंधन रिटेल आउटलेट पर वाटर इन्ग्रेस टेस्ट दिन में 8 से 12 बार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भूमिगत भंडारण टैंक या ईंधन वितरण प्रणाली में पानी की मौजूदगी का जल्द पता लगाना है।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह अतिरिक्त जांच OMCs की पहले से मौजूद उन्नत और विस्तृत परीक्षण व्यवस्था के साथ की जा रही है। यानी नए अभियान ने नियमित गुणवत्ता निगरानी को समाप्त नहीं किया है, बल्कि मौजूदा सुरक्षा प्रणाली में अतिरिक्त जांच जोड़ी गई है।
2,000 से ज्यादा नमूनों में केवल दो क्लोराइड मामले
ईंधन में क्लोराइड और सल्फाइड संदूषण की पहचान के लिए अब तक 2,000 से अधिक नमूनों का परीक्षण किया गया है। मंत्रालय के अनुसार पूरे देश में क्लोराइड संदूषण के केवल दो मामले सामने आए हैं।
जिन दो आउटलेट पर संदूषण मिला, वहां से ईंधन की बिक्री तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गई। मंत्रालय की सार्वजनिक सूचना में दोनों आउटलेट के नाम, कंपनी, शहर या राज्य का उल्लेख नहीं किया गया है।
बिक्री निलंबित हुई, स्थायी रूप से पंप बंद होने की घोषणा नहीं
मंत्रालय ने दोनों प्रभावित आउटलेट पर ईंधन की बिक्री रोकने की जानकारी दी है। सार्वजनिक बयान में संबंधित डीलरशिप या पेट्रोल पंप का लाइसेंस स्थायी रूप से समाप्त करने की घोषणा नहीं की गई।
OMC की मौजूदा मार्केटिंग अनुशासन गाइडलाइन के अनुसार घनत्व या फिल्टर पेपर जांच असफल होने पर बिक्री निलंबित कर नमूने प्रयोगशाला भेजे जा सकते हैं। इसके बाद जांच परिणाम के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होती है।
केवल पेट्रोल पंप नहीं, पूरी सप्लाई चेन की जांच
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को संभावित संदूषण का पता लगाने के लिए ईंधन की संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला पर सक्रिय निगरानी रखने को कहा गया है। इसका अर्थ है कि जांच का दायरा केवल उस अंतिम रिटेल आउटलेट तक सीमित नहीं रहेगा, जहां वाहन में ईंधन भरा जाता है। आपूर्ति और वितरण के अलग-अलग चरणों पर नमूने तथा रिकॉर्ड जांचे जा सकते हैं, ताकि समस्या के वास्तविक स्रोत की पहचान की जा सके।
मंत्रालय के आंकड़े एक नजर में
| विषय | मंत्रालय की जानकारी |
|---|---|
| निगरानी वाले रिटेल आउटलेट | 87,000 से अधिक |
| वाटर इन्ग्रेस जांच | दिन में 8–12 बार |
| क्लोराइड-सल्फाइड के लिए जांचे नमूने | 2,000 से अधिक |
| मिले क्लोराइड संदूषण मामले | 2 |
| प्रभावित आउटलेट पर कार्रवाई | बिक्री तत्काल निलंबित |
| आगे का निर्देश | पूरी सप्लाई चेन की सक्रिय निगरानी |
ये आंकड़े पेट्रोलियम मंत्रालय के 4 अगस्त के सार्वजनिक स्पष्टीकरण पर आधारित हैं। नमूनों का राज्यवार विवरण और दोनों प्रभावित आउटलेट की पहचान मंत्रालय ने जारी नहीं की है।
ग्राहक पेट्रोल की गुणवत्ता कैसे जांच सकता है?
पेट्रोल पंप पर उपलब्ध ईंधन की गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर उपभोक्ता कुछ बुनियादी जांच की मांग कर सकता है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी HPCL की उपभोक्ता मार्गदर्शिका में पेट्रोल के लिए फिल्टर पेपर टेस्ट और पेट्रोल-डीजल के लिए डेंसिटी टेस्ट का उल्लेख है।
पेट्रोल के लिए फिल्टर पेपर टेस्ट
ग्राहक पंप संचालक से फिल्टर पेपर टेस्ट कराने को कह सकता है। इस जांच में डिस्पेंसिंग नोजल से पेट्रोल की एक बूंद साफ फिल्टर पेपर पर डाली जाती है।
HPCL की मार्गदर्शिका के अनुसार पेट्रोल करीब दो मिनट में उड़ जाना चाहिए और पेपर पर कोई दाग नहीं रहना चाहिए। दाग रह जाने पर मिलावट की आशंका हो सकती है और इसकी शिकायत की जानी चाहिए। रिटेल आउटलेट को ग्राहक की मांग पर फिल्टर पेपर उपलब्ध कराना होता है।
पेट्रोल और डीजल का डेंसिटी टेस्ट
उपभोक्ता पेट्रोल या डीजल का घनत्व जांचने के लिए डेंसिटी टेस्ट की मांग कर सकता है। इसमें हाइड्रोमीटर और थर्मामीटर से रीडिंग लेकर उसे पेट्रोल पंप के डेंसिटी रजिस्टर में दर्ज संदर्भ आंकड़े से मिलाया जाता है।
घनत्व में निर्धारित सीमा से अंतर मिलने पर नमूना लेकर विस्तृत जांच की जा सकती है। डेंसिटी टेस्ट पेट्रोल और डीजल—दोनों के लिए उपलब्ध है।
पांच लीटर की मात्रा जांच
हर रिटेल आउटलेट पर प्रमाणित पांच लीटर माप रखने की व्यवस्था होती है। कम ईंधन मिलने का संदेह होने पर ग्राहक इसी माप से मात्रा की जांच की मांग कर सकता है।
ईंधन भराते समय मशीन का मीटर शून्य पर है या नहीं, यह देखना और खरीद की रसीद लेना भी उपयोगी है। रसीद में पंप, तारीख, समय और खरीद की मात्रा का रिकॉर्ड रहता है।
ईंधन में गड़बड़ी का संदेह हो तो क्या करें?
ग्राहक पेट्रोल पंप पर ही फिल्टर पेपर, डेंसिटी या मात्रा जांच की मांग कर सकता है। पंप पर संबंधित OMC अधिकारी का नाम और संपर्क नंबर प्रदर्शित होना चाहिए। शिकायत पुस्तिका भी ग्राहक को मांगने पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
शिकायत करते समय इन जानकारियों को सुरक्षित रखें:
- पेट्रोल पंप का नाम और पूरा स्थान
- ईंधन भराने की तारीख और समय
- मशीन या नोजल की पहचान, उपलब्ध होने पर
- खरीद की रसीद या डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड
- वाहन में आई समस्या का सर्विस सेंटर रिकॉर्ड
- गुणवत्ता जांच की फोटो या वीडियो, सुरक्षित तरीके से उपलब्ध होने पर
केवल वाहन में खराबी आने से यह अपने आप प्रमाणित नहीं होता कि ईंधन मिलावटी था। जिम्मेदारी तय करने के लिए अधिकृत नमूना जांच और तकनीकी परीक्षण जरूरी हो सकते हैं।