कोलकाता - पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने अपने उम्मीदवार के चुनाव मैदान से हटने के बाद कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने का ऐलान किया है। इस घटनाक्रम पर टीएमसी सांसद सायोनी घोष ने कहा कि चुनाव से पहले राजनीतिक दल कई तरह के फैसले ले सकते हैं और यह फैसला संबंधित पार्टियों के बीच का विषय है।
सायोनी घोष ने क्या कहा?
कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने के सवाल पर सायोनी घोष ने कहा कि यह राजनीति का हिस्सा है। उनके मुताबिक, चुनाव से पहले क्या निर्णय लिया जाए और किस तरह की रणनीति अपनाई जाए, यह संबंधित दोनों पार्टियों के बीच का मामला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस या बीजेपी, सभी राजनीतिक दलों को अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करने की स्वतंत्रता है। जरूरत पड़ने पर कोई भी पक्ष चुनाव आयोग या अदालत का रुख कर सकता है।
ममता ने कांग्रेस को दिया समर्थन
ममता बनर्जी ने 18 सितंबर को नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया। यह फैसला उनकी पार्टी के उम्मीदवार संचिता प्रधान डे के नामांकन वापस लेने के बाद आया। ममता ने कहा कि उनका गुट नंदीग्राम में दूसरा उम्मीदवार नहीं उतारेगा और कांग्रेस प्रत्याशी का समर्थन करेगा।
उपचुनाव से पहले बदला राजनीतिक समीकरण
नंदीग्राम उपचुनाव 6 अक्टूबर को होना है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब चुनाव आयोग ने टीएमसी के नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद के बीच ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल प्लेयर’ चुनाव चिह्न आवंटित किया है। सायोनी घोष के बयान से साफ है कि पार्टी इस घटनाक्रम को राजनीतिक और संवैधानिक प्रक्रिया के दायरे में देख रही है। वहीं, नंदीग्राम में कांग्रेस को मिले समर्थन के बाद उपचुनाव की राजनीतिक तस्वीर पर सभी दलों की नजर बनी हुई है।