भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून का दौर अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा है। बारिश की गतिविधियां कम होने के साथ प्रदेश के कुछ हिस्सों में तापमान बढ़ने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार 19 सितंबर 2026 के आसपास पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं। इसी बीच मध्यप्रदेश में शनिवार को कई जिलों में बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है। दूसरी ओर, खजुराहो में 34°C तापमान दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे अधिक रहा।
खजुराहो रहा सबसे गर्म, तापमान में बढ़ोतरी
प्रदेश में बारिश का दौर कमजोर होने के बाद अब दिन के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। खजुराहो में 34 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जो शनिवार से पहले प्रदेश में सबसे अधिक रहा।मौसम में बदलाव के साथ आने वाले दिनों में कई क्षेत्रों में तापमान बढ़ने की स्थिति बन सकती है।
भोपाल समेत कई जिलों में बारिश के आसार
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 19 सितंबर, शनिवार को भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा और सागर समेत कई जिलों में बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।
इन जिलों में भी बारिश की संभावना जताई गई है
भोपाल
विदिशा
रायसेन
सीहोर
नर्मदापुरम
बैतूल
धार
इंदौर
उज्जैन
ग्वालियर
रीवा
सतना
उमरिया
जबलपुर
सागर
कुछ अन्य जिलों में भी स्थानीय मौसम परिस्थितियों के अनुसार बारिश हो सकती है।
राजगढ़ से बालाघाट तक कई जिलों में बारिश की संभावना
मौसम विभाग ने राजगढ़, झाबुआ, रतलाम, मंदसौर, नीमच, गुना, मंडला और बालाघाट समेत कई जिलों में अनेक स्थानों पर बारिश होने की संभावना जताई है।इस दौरान कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बौछारें भी पड़ सकती हैं। स्थानीय स्तर पर मौसम में बदलाव को देखते हुए लोगों को मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी जाती है।
ग्वालियर-चंबल में पिछले 24 घंटे में बारिश
पिछले 24 घंटे के दौरान ग्वालियर-चंबल संभाग में कई स्थानों पर बारिश दर्ज की गई। हालांकि, प्रदेश में बारिश की गतिविधि पहले की तुलना में कम हुई है और इसी वजह से कुछ क्षेत्रों में तापमान बढ़ने लगा है।
पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी के संकेत
मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी राजस्थान से 19 सितंबर के आसपास मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं।मानसून की वापसी शुरू होने के साथ ही मध्यप्रदेश में भी बारिश की गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना रहती है। हालांकि, मानसून की वापसी के दौरान भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय मौसम प्रणालियों के कारण बारिश का दौर जारी रह सकता है।