गयाजी: पितृपक्ष के दौरान गयाजी में पिंडदान और तर्पण के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए राहत भरी पहल की गई है। अयोध्या की राम रसोई और सीतामढ़ी की सीता रसोई के बाद अब गयाजी में ‘विष्णु रसोई’ शुरू की गई है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बिना किसी शुल्क के भोजन कराया जाएगा।
पितृपक्ष में 15 दिन चलेगी सेवा
श्री महावीर स्थान न्यास समिति, पटना की ओर से लगातार दूसरे साल गयाजी में विष्णु रसोई का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष यह सेवा 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। रसोई का उद्घाटन समिति के सचिव सायण कुणाल ने किया।
विष्णुपद मंदिर के पास की गई भोजन की व्यवस्था
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विष्णु रसोई की व्यवस्था विष्णुपद मंदिर के नजदीक की गई है। इसका उद्देश्य यह है कि पिंडदान या पूजा-पाठ के बाद श्रद्धालुओं को भोजन के लिए दूर तक भटकना न पड़े। खास तौर पर दूसरे राज्यों और शहरों से आने वाले लोगों के लिए यह सुविधा उपयोगी होगी।
कोई भी श्रद्धालु कर सकता है भोजन
विष्णु रसोई में भोजन पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। समिति के मुताबिक पितृपक्ष के दौरान गयाजी आने वाला कोई भी श्रद्धालु इस सेवा का लाभ उठा सकता है। भोजन की व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
पिछले साल शुरू हुई थी पहल
गयाजी में विष्णु रसोई की शुरुआत वर्ष 2025 में पद्मश्री आचार्य किशोर कुणाल की स्मृति में की गई थी। पितृपक्ष के दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने पूर्वजों के पिंडदान के लिए गया पहुंचते हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं को भोजन उपलब्ध कराने की यह व्यवस्था पिछले साल से सेवा का हिस्सा बनी हुई है।
गयाजी में पिंडदान का विशेष महत्व
गया का विष्णुपद मंदिर पिंडदान और श्राद्ध कर्म के लिए प्रमुख धार्मिक स्थलों में माना जाता है। बिहार पर्यटन के अनुसार, यह मंदिर फल्गु नदी के किनारे स्थित है और यहां भगवान विष्णु के चरणचिह्न वाली शिला प्रमुख आस्था केंद्र है। पितृपक्ष के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
सेवा, श्रद्धा और मानव कल्याण का संदेश
महावीर मंदिर न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल के अनुसार, सेवा और मानव कल्याण भारतीय सनातन परंपरा के महत्वपूर्ण आधार हैं। पितृपक्ष जैसे अवसर पर श्रद्धालुओं को भोजन कराना पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और सामाजिक सेवा से भी जुड़ा हुआ है।