नई दिल्ली - भारत में डिजिटल भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार 2,000 रुपये से अधिक के बिजनेस (मर्चेंट) UPI भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने पर विचार कर रही है। हालांकि, फिलहाल इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
क्या है सरकार का प्रस्ताव?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल पेश किया है। इस विधेयक में बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स पर इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के लिए MDR लगाने पर लगी रोक हटाने का प्रस्ताव रखा गया है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI ट्रांजेक्शन पर 0.25% से 0.40% तक शुल्क लगाया जा सकता है।
किन लेनदेन पर पड़ेगा असर?
यह प्रस्ताव केवल व्यापारिक (Merchant) UPI भुगतान पर लागू होगा। यानी किसी दुकान, मॉल, होटल, रेस्टोरेंट या ऑनलाइन बिजनेस को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर MDR लग सकता है। वहीं, व्यक्ति से व्यक्ति (Person-to-Person) होने वाले UPI ट्रांसफर पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। यानी दोस्तों, परिवार या किसी अन्य व्यक्ति को भेजे जाने वाले पैसे पहले की तरह मुफ्त रहेंगे।
95% आम UPI यूजर्स पर नहीं पड़ेगा असर
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, 2,000 रुपये की सीमा कुल UPI ट्रांजेक्शन की संख्या का केवल करीब 5% हिस्सा कवर करती है। हालांकि, इन लेनदेन का मूल्य कुल UPI ट्रांजेक्शन वैल्यू का लगभग 65% है। इसका मतलब है कि दूध, सब्जी, किराना, ऑटो, टैक्सी या छोटे-मोटे रोजमर्रा के भुगतान करने वाले अधिकांश लोगों पर इस प्रस्ताव का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
क्या ग्राहकों को देना होगा अतिरिक्त पैसा?
यदि MDR लागू होता भी है तो यह जरूरी नहीं कि हर व्यापारी इसका बोझ ग्राहकों पर डाले। कई बड़े व्यापारी इसे खुद वहन कर सकते हैं, जबकि कुछ मामलों में इसका असर ग्राहकों तक पहुंच सकता है। फिलहाल सरकार ने शुल्क लागू करने की कोई तारीख तय नहीं की है।
UPI का लगातार बढ़ रहा उपयोग
भारत में UPI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। जुलाई महीने में करीब 23.7 अरब UPI लेनदेन दर्ज किए गए, जिनका कुल मूल्य लगभग 29.9 लाख करोड़ रुपये रहा। यही वजह है कि सरकार और भुगतान सेवा प्रदाता डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
अभी अंतिम फैसला बाकी
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है। MDR कब और किस स्वरूप में लागू होगा, इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में फिलहाल आम UPI उपयोगकर्ताओं को किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।