आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल तकनीकी कंपनियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि बैंकिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा, विनिर्माण, मीडिया, विपणन और सेवा क्षेत्र सहित लगभग हर उद्योग में कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इसी बदलते परिदृश्य के बीच एडीपी रिसर्च इंस्टीट्यूट की ताजा वैश्विक रिपोर्ट में भारत को एआई अपनाने के मामले में दुनिया का अग्रणी देश बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय कर्मचारी नई तकनीकों को लेकर बेहद सकारात्मक सोच रखते हैं और उन्हें अपने दैनिक कार्यों में तेजी से शामिल कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल परिवर्तन, तकनीकी कौशल और तेजी से विकसित हो रहे नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र ने भारत को इस क्षेत्र में वैश्विक बढ़त दिलाई है।
कामकाजी महिलाओं ने एआई के उपयोग में पुरुषों को छोड़ा पीछे
रिपोर्ट का सबसे उल्लेखनीय निष्कर्ष यह रहा कि भारत में कामकाजी महिलाएं एआई टूल्स को अपनाने के मामले में पुरुषों से आगे निकल गई हैं। आंकड़ों के अनुसार देश की 44 प्रतिशत कामकाजी महिलाएं लगभग प्रतिदिन अपने कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित उपकरणों का उपयोग करती हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 40 प्रतिशत है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव केवल तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि भारतीय महिलाएं डिजिटल कौशल, नवाचार और पेशेवर दक्षता के क्षेत्र में लगातार अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। यह प्रवृत्ति कार्यस्थलों पर लैंगिक समानता और तकनीकी नेतृत्व की दिशा में भी सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
भारतीय कर्मचारियों का एआई पर बढ़ता भरोसा बदल रहा है कार्य संस्कृति
रिपोर्ट के अनुसार भारत के लगभग 80 प्रतिशत कर्मचारी सप्ताह में कई बार एआई आधारित उपकरणों का उपयोग करते हैं। वहीं 41 प्रतिशत कर्मचारी ऐसे हैं जो अपने रोजमर्रा के कार्यालयी कार्यों में प्रतिदिन एआई की सहायता लेते हैं। दस्तावेज तैयार करने, डेटा विश्लेषण, प्रस्तुतीकरण, ग्राहक संवाद, शोध, सामग्री निर्माण और निर्णय प्रक्रिया जैसे अनेक क्षेत्रों में एआई का उपयोग तेजी से बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कार्य की गति, उत्पादकता और गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है। यही कारण है कि भारतीय कर्मचारी एआई को नौकरी के लिए खतरे के बजाय दक्षता बढ़ाने वाले सहयोगी के रूप में देख रहे हैं।
भविष्य को लेकर भी कर्मचारियों का नजरिया है बेहद सकारात्मक
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि भारत के लगभग 31 प्रतिशत कर्मचारियों का दृढ़ विश्वास है कि आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उनके कार्यक्षेत्र की जिम्मेदारियों और पेशेवर विकास पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा। विशेषज्ञों के अनुसार एआई दोहराए जाने वाले कार्यों को सरल बनाकर कर्मचारियों को अधिक रचनात्मक, विश्लेषणात्मक और रणनीतिक जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर देता है। हालांकि इसके साथ ही डिजिटल कौशल, निरंतर प्रशिक्षण और नई तकनीकों के अनुरूप स्वयं को तैयार करना भी भविष्य की आवश्यकता माना जा रहा है। कंपनियां भी कर्मचारियों के कौशल उन्नयन पर पहले की तुलना में अधिक निवेश कर रही हैं।
वैश्विक सूची में भारत पहले स्थान पर, उभरती अर्थव्यवस्थाए भी दौड़ में शामिल
एडीपी रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार प्रतिदिन एआई उपयोग करने वाले कर्मचारियों के मामले में भारत 41 प्रतिशत के साथ विश्व में पहले स्थान पर है। दूसरे स्थान पर नाइजीरिया है, जहां 39 प्रतिशत कर्मचारी नियमित रूप से एआई का उपयोग करते हैं। इसके बाद वियतनाम का स्थान आता है, जिसने भी नई तकनीकों को तेजी से अपनाने में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। विशेषज्ञों का मानना है कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में डिजिटल परिवर्तन की गति विकसित देशों की तुलना में अधिक तेज दिखाई दे रही है, क्योंकि यहां नई तकनीकों को अपनाने की संभावनाएं और कार्यबल की अनुकूलन क्षमता दोनों अधिक हैं।
युवा पेशेवर बने डिजिटल बदलाव की सबसे बड़ी ताकत
रिपोर्ट में आयु वर्ग के आधार पर भी महत्वपूर्ण अंतर सामने आया है। 18 से 39 वर्ष आयु वर्ग के कर्मचारी एआई अपनाने में सबसे आगे हैं। इस वर्ग के लगभग 43 प्रतिशत युवा कर्मचारी प्रतिदिन अपने कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल शिक्षा, नई तकनीकों के प्रति सहजता और नवाचार को शीघ्र अपनाने की प्रवृत्ति युवा पीढ़ी को इस परिवर्तन का प्रमुख वाहक बना रही है। आने वाले वर्षों में जैसे-जैसे एआई आधारित तकनीकों का विस्तार होगा, वैसे-वैसे डिजिटल कौशल, डेटा विश्लेषण और मानव-एआई सहयोग आधुनिक कार्यस्थलों की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में शामिल हो जाएंगे।